महाराष्ट्र में 15 अक्टूबर से शुरू होगा पेराई सीजन, कर्नाटक की चीनी मिलों पर दोहरी मार का मंडराया संकट
बेलगावी की 30 चीनी मिलों के सामने गन्ने की उपलब्धता और परिपक्वता बनी सबसे बड़ी चुनौती; सीमावर्ती इलाकों से महाराष्ट्र गन्ना शिफ्ट होने का खतरा।
भदैनी मिरर डेस्क, बेलगावी/वाराणसी: महाराष्ट्र सरकार द्वारा आगामी 15 अक्टूबर से गन्ना पेराई सीजन शुरू करने की घोषणा के बाद पड़ोसी राज्य कर्नाटक के चीनी उद्योग में हलचल तेज हो गई है। कर्नाटक में अब तक पेराई सीजन शुरू करने की आधिकारिक तारीख तय नहीं हो सकी है, जिससे राज्य की, खासकर सीमावर्ती बेलगावी जिले की चीनी मिलों पर दोहरी मार पड़ने का संकट मंडराने लगा है।
कम परिपक्व गन्ने से चीनी रिकवरी घटने का खतरा
इस वर्ष मानसून के दौरान कम बारिश के कारण कई इलाकों में गन्ने की फसल की अपेक्षित ग्रोथ नहीं हो सकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अक्टूबर के मध्य से ही पेराई शुरू कर दी जाती है, तो मिलों में कम परिपक्व (अपरिपक्व) गन्ने की पेराई होगी।
इससे पेराई के शुरुआती दिनों से ही चीनी की रिकवरी दर काफी कम रहेगी, जिसका सीधा प्रतिकूल असर चीनी के कुल उत्पादन और फेयर एंड रिमुनरेटिव प्राइस (FRP) की गणना पर पड़ेगा। इसके अलावा, यदि सीजन जनवरी के अंत तक ही सिमट जाता है, तो गन्ने में स्वाभाविक रूप से रिकवरी बढ़ने का प्राकृतिक समय भी नहीं मिल पाएगा।
सीमावर्ती क्षेत्रों से गन्ना महाराष्ट्र जाने की होड़
बेलगावी जिले में इस बार 30 चीनी मिलें पेराई सत्र में उतरने की तैयारी में हैं, जिनमें से कई मिलों ने अपनी पेराई क्षमता भी बढ़ाई है। हालांकि, महाराष्ट्र की मिलें पहले शुरू होने के कारण सीमावर्ती इलाकों से गन्ने की आपूर्ति महाराष्ट्र की तरफ होने का बड़ा जोखिम है।
पिछले सीजन में महाराष्ट्र की मिलें देर से शुरू हुई थीं, जिसका सीधा फायदा कर्नाटक की मिलों को मिला था और उन्होंने लगभग 100 दिनों के सीजन में 1.75 करोड़ टन गन्ने की पेराई की थी। लेकिन इस बार बाजी पलटती दिख रही है।
गन्ने की उपलब्धता ही सबसे बड़ी चुनौती
कर्नाटक की मिलों के लिए इस बार तीन प्रमुख चुनौतियां एक साथ खड़ी हैं:
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गन्ने की वास्तविक उपलब्धता में भारी कमी
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अपरिपक्व गन्ने के कारण चीनी रिकवरी दर का घटना
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महाराष्ट्र की मिलों से गन्ने की खरीद को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा
इस स्थिति के कारण कर्नाटक के चीनी मिल मालिकों और गन्ना किसानों दोनों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं।