असम बाढ़ संकट: चीन, भारी बारिश या ब्रह्मपुत्र नदी? जानिए हर साल क्यों डूबता है असम!
असम में हर साल बाढ़ का तांडव: चीन, भारी बारिश या ब्रह्मपुत्र—आखिर कौन है तबाही का असली जिम्मेदार?
भदैनी मिरर: पूर्वोत्तर भारत का प्राकृतिक सौंदर्य से लबरेज़ राज्य असम एक बार फिर भयानक कुदरती आपदा की ज़द में है। राज्य में मूसलाधार बारिश और नदियों के उफान ने भीषण तबाही मचा रखी है। 16 से अधिक जिलों में जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर चुका है और लगभग आठ लाख लोग इस त्रासदी से सीधे प्रभावित हुए हैं।
हालात की गंभीरता को देखते हुए राहत व बचाव कार्यों में NDRF, SDRF, भारतीय सेना और वायुसेना को मुस्तैद किया गया है। लेकिन हर साल मानसून के दस्तक देते ही उठने वाला यह यक्ष प्रश्न आज भी जस का तस है—आखिर हर साल असम को पानी में डुबोने का असली जिम्मेदार कौन है?
1. ब्रह्मपुत्र की भौगोलिक बनावट और 'गाद' की समस्या
असम की इस वार्षिक त्रासदी का सबसे मुख्य कारण खुद विशालकाय ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी भौगोलिक स्थिति है।
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नदी का उथला तल: तिब्बत (चीन) से 'यारलुंग त्सांगपो' के नाम से निकलने वाली ब्रह्मपुत्र अरुणाचल प्रदेश के रास्ते असम में प्रवेश करती है। असम पहुँचते-पहुँचते मानस, सुबनसिरी और कोपिली जैसी 50 से अधिक सहायक नदियां इसमें समाहित हो जाती हैं।
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मलबे का जमाव: युवा हिमालय पर्वत श्रृंखला से बहकर आने के कारण यह नदी अपने साथ भारी मात्रा में मिट्टी, गाद (Silt) और चट्टानी मलबा लाती है। यह गाद नदी के तल पर जमा हो जाती है, जिससे नदी की गहराई कम हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप, थोड़े से अतिरिक्त पानी में भी नदी विकराल रूप धारण कर लेती है।
2. जलवायु परिवर्तन और 'क्लाउड बर्स्ट' जैसी अतिवृष्टि
वैश्विक स्तर पर हो रहे जलवायु परिवर्तन (Climate Change) ने उत्तर-पूर्व भारत के मानसूनी पैटर्न को पूरी तरह प्रभावित किया है।
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अब कम समय में अत्यधिक बारिश (Flash Floods/Extreme Rainfall) का रुझान बढ़ा है।
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पहाड़ियों पर मूसलाधार बारिश के चलते होने वाले भूस्खलन का मलबा सीधे नदियों में आकर गिरता है। इससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित होता है और मैदानी इलाकों में अचानक जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुँच जाता है।
3. इंसानी अतिक्रमण और जर्जर हो चुके तटबंध (Embankments)
कुदरत के साथ-साथ इस तबाही में मानवीय गलतियों की भी बड़ी भूमिका है:
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पर्यावरण का विनाश: जंगलों की अंधाधुंध कटाई और प्राकृतिक जल-जमाव वाले क्षेत्रों (Wetlands) पर अवैध कब्जों के कारण पानी को रोकने की कुदरती क्षमता खत्म हो गई है।
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कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर: नदी किनारे बने अधिकांश तटबंध अब पुराने और कमजोर हो चुके हैं, जो पानी के जरा से दबाव में बह जाते हैं। इसके अलावा ब्रह्मपुत्र अपनी जलधारा (Course) बदलने के लिए जानी जाती है, जिससे केवल पारंपरिक तटबंधों के सहारे इस आपदा को रोकना लगभग असंभव साबित हो रहा है।
निष्कर्ष: स्थायी समाधान की आवश्यकता
चीन से आने वाले पानी, अचानक भारी बारिश और नदी में जमती गाद—इन सभी का संयुक्त असर असम के लिए हर साल एक काल बन जाता है। जब तक ब्रह्मपुत्र की वैज्ञानिक तरीके से गाद निकालने (Dredging), आधुनिक तटबंध निर्माण और पर्यावरण संरक्षण जैसे दीर्घकालिक कदम नहीं उठाए जाते, तब तक असम को इस विनाशकारी दौर से उबारना एक चुनौती बना रहेगा।