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 9 साल के बच्चे ने लगाई थी पहली पौध, अब 1 ट्रिलियन पेड़ लगाने का महाअभियान

जर्मनी में चौथी कक्षा के स्कूल प्रेजेंटेशन से शुरू हुआ था सफर; 13 की उम्र में पहुंचे संयुक्त राष्ट्र, अब तक 11 करोड़ से अधिक पेड़ों की हो चुकी है फंडिंग।

 

भदैनी मिरर इंटरनेशनल डेस्क: जनवरी 2007 में जर्मनी में चौथी कक्षा में पढ़ने वाले 9 साल के बच्चे फेलिक्स फिंकबाइनर (Felix Finkbeiner) को जब स्कूल में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) पर प्रेजेंटेशन देने को कहा गया, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह एक दिन दुनिया का सबसे बड़ा ग्रीन मूवमेंट बन जाएगा।

पढ़ाई के दौरान फेलिक्स को केन्या की नोबेल पुरस्कार विजेता वंगारी मथाई की कहानी पता चली, जिनके 'ग्रीन बेल्ट मूवमेंट' ने लाखों पेड़ लगाए थे। फेलिक्स ने अपने स्कूल प्रेजेंटेशन का अंत एक साधारण सुझाव के साथ किया— "दुनिया के हर देश के बच्चों को कम से कम 10 लाख पेड़ लगाने चाहिए।"

स्कूल प्रोजेक्ट से शुरू हुआ 'प्लांट-फॉर-द-प्लैनेट'

28 मार्च 2007 को फेलिक्स ने अपने सहपाठियों के साथ स्कूल के बाहर पहला पौधा रोपा और इसी के साथ जन्म हुआ 'प्लांट-फॉर-द-प्लैनेट' (Plant-for-the-Planet) पहल का।

  • 3 साल में 10 लाखवां पेड़: जो शुरुआत एक छोटे से स्कूल असाइनमेंट से हुई थी, उसने सिर्फ तीन सालों में गति पकड़ ली। यूनाइटेड नेशंस एनवायरनमेंट प्रोग्राम (UNEP) के अनुसार, केवल 3 सालों में जर्मनी में इस पहल के तहत 10 लाखवां पेड़ लगाया गया।

  • UN तक पहुंचा संदेश: महज 13 साल की उम्र में फेलिक्स फिंकबाइनर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) के मंच से दुनिया के दिग्गज नेताओं को अपना पर्यावरण संदेश पहुंचाया।

लक्ष्य: 1 ट्रिलियन (10 खरब) पेड़ उगाना

फेलिक्स द्वारा पहला पौधा रोपे जाने के सालों बाद आज 'प्लांट-फॉर-द-प्लैनेट' का लक्ष्य बहुत विशाल हो चुका है। संस्था का वैश्विक लक्ष्य दुनिया भर में 1 ट्रिलियन (10 खरब) पेड़ उगाने और संरक्षित करने में मदद करना है।

वर्तमान में फिंकबाइनर और उनकी संस्था मेक्सिको, घाना और स्पेन जैसे देशों में बड़े पैमाने पर रीफॉरस्टेशन (पुनर्वनीकरण) और संरक्षण प्रोजेक्ट्स चला रही है। संस्था ने खुद 3.6 करोड़ से ज्यादा पेड़ लगाए हैं, जबकि इसके प्लेटफॉर्म के जरिए 11 करोड़ (110 मिलियन) से अधिक पेड़ों के लिए ग्लोबल फंडिंग जुटाई गई है।

चॉकलेट बिक्री से भी उग रहे हैं जंगल

पर्यावरण संरक्षण और फंड जुटाने के लिए संस्था ने 2012 में 'द चेंज चॉकलेट' (The Change Chocolate) लॉन्च की। इस खास चॉकलेट बार की बिक्री से मिलने वाले फंड से अब तक 1 करोड़ (10 मिलियन) से ज्यादा पेड़ लगाए जा चुके हैं।

"पेड़ लगाना विकल्प है, फॉसिल फ्यूल बंद करने का विकल्प नहीं"

संस्था इस बात पर भी जोर देती है कि नए पेड़ लगाना जीवाश्म ईंधनों (Fossil Fuels) से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने का सीधा विकल्प नहीं हो सकता।

नए पौधे को एक पुराने, विशालकाय पेड़ जितना कार्बन सोखने में कई दशक लग जाते हैं। इसलिए नए पौधे लगाने के साथ-साथ पहले से मौजूद जंगलों और पुराने पेड़ों को कटने से बचाना भी उतना ही जरूरी है।