{"vars":{"id": "125128:4947"}}

ओडिशा के बालासोरे में मिले 5 दुर्लभ ओरंगुटान, इंडोनेशिया से तस्करी कर लाए जाने का शक; ASI और WCCB जांच में जुटी

ओडिशा वन विभाग ने बालासोरे जिले के एक तटीय जंगल से 5 शिशु ओरंगुटान को रेस्क्यू किया है। अधिकारियों को अंदेशा है कि इन्हें अंतरराष्ट्रीय तस्करी के जरिए इंडोनेशिया से समुद्र के रास्ते लाया गया है।

 

ओडिशा के बालासोरे जिले में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां वन विभाग ने मंगलवार को एक कैसुरीना (Casuarina) के जंगल से पांच शिशु ओरंगुटान (Baby Orangutans) को सुरक्षित रेस्क्यू किया है। मूल रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया (इंडोनेशिया के सुमात्रा और बोर्नियो) के वर्षा वनों में पाए जाने वाले इन दुर्लभ जीवों के ओडिशा मिलने से यह साफ है कि इसके पीछे किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी रैकेट का हाथ हो सकता है।

कैसे हुआ खुलासा?

बालासोरे जिले के भोगराई ब्लॉक के तहत बिचित्रापुर गांव के पास समुद्र के करीब स्थित इस जंगल में ग्रामीणों ने पहले इन जीवों को पेड़ों से लटकते हुए देखा था। शुरुआत में ग्रामीणों को लगा कि यह किसी सामान्य प्रजाति के बंदर हैं, और वे उन्हें पकड़ने की कोशिश करने लगे। लेकिन जब उनका रंग-रूप और शारीरिक बनावट बंदरों से अलग दिखाई दी, तो ग्रामीणों ने तुरंत स्थानीय वन विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना दी।

सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तीन नर तथा दो मादा—कुल पांचों शिशु ओरंगुटान को सुरक्षित रेस्क्यू कर पिंजरे में बंद किया। वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) की एक टीम भी मामले की जांच के लिए भोगराई ब्लॉक पहुंच चुकी है।

स्वास्थ्य परीक्षण के बाद नंदन कानन जू भेजे गए

बालासोरे के प्रभागीय वन अधिकारी (DFO) प्रतीक प्रकाश इंदुलकर ने बताया कि सभी baby orangutans को वन कार्यालय लाया गया, जहां पशु चिकित्सकों (Veterinary Doctors) द्वारा उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। डॉक्टरों के अनुसार सभी की सेहत ठीक है और उन्हें भोजन व ओआरएस (ORS) दिया गया है। इसके बाद उन्हें भुवनेश्वर के प्रसिद्ध नंदन कानन चिड़ियाघर (Nandan Kanan Zoo) में शिफ्ट कर दिया गया है।

मुख्य वन्यजीव वार्डन प्रेम कुमार झा ने कहा कि शुरुआती जांच में अंदेशा है कि इन वन्यजीवों को समुद्री जहाज के जरिए दक्षिण-पूर्व एशिया से लाया गया है। यह जांच की जा रही है कि क्या इन्हें कोलकाता के रईस लोगों को बेचने के लिए लाया गया था या इसके पीछे कोई और मकसद था, और इन्हें यहां क्यों छोड़ा गया। फिलहाल वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो और वन विभाग मिलकर इस अंतरराष्ट्रीय तस्करी सिंडिकेट की गहराई से छानबीन कर रहे हैं।