{"vars":{"id": "125128:4947"}}

UNGA Election: खलीलुर रहमान बने संयुक्त राष्ट्र महासभा के नए अध्यक्ष, मानवाधिकार और वैश्विक संवाद पर रहेगा जोर

सदस्य देशों के बीच भरोसा बहाल करने और शांति को देंगे बढ़ावा : खलीलुर रहमान 

 

न्यूयॉर्क/नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के अध्यक्ष पद के लिए हुए कड़े मुकाबले में बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने शानदार जीत दर्ज की है। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी और साइप्रस के विशेष दूत एंड्रियास काकौरिस को हराकर यह महत्वपूर्ण पद हासिल किया। इस चुनाव में रहमान को 99 वोट मिले, जबकि काकौरिस को 91 मतों से संतोष करना पड़ा। खलीलुर रहमान का एक वर्ष का कार्यकाल इसी साल सितंबर महीने से शुरू होगा।

'सभी देशों का अध्यक्ष रहूंगा'

चुनाव जीतने के बाद महासभा को दिए अपने पहले संबोधन में रहमान ने स्पष्ट किया कि उनका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच भरोसा बहाल करना और सकारात्मक बातचीत का माहौल बनाना है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, "मैं सभी देशों का अध्यक्ष रहूंगा और अपने व्यक्तिगत विचारों को काम के बीच नहीं आने दूंगा।" उनका विजन मतभेदों को नजरअंदाज किए बिना एक साझा और सर्वमान्य समाधान खोजना है।

कार्यकाल की 6 प्रमुख प्राथमिकताएं

फरवरी में बांग्लादेश के विदेश मंत्री का पद संभालने वाले रहमान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए अपने विजन को स्पष्ट करते हुए छह प्रमुख प्राथमिकताएं गिनाईं:

  • शांति, सुरक्षा और न्याय: वैश्विक स्तर पर संघर्षों को कम करना।

  • सतत विकास लक्ष्य (SDGs): रुके हुए विकास कार्यों की प्रगति को गति देना।

  • जलवायु और पर्यावरण: जलवायु लचीलापन और पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करना।

  • मानवाधिकार और मानवीय सहायता: शरणार्थी और प्रवासी संकट का समाधान।

  • तकनीक और प्रशासन: डिजिटल प्रशासन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), विज्ञान और प्रौद्योगिकी का विकास।

  • संयुक्त राष्ट्र सुधार: बहुपक्षवाद को बढ़ावा देना और यूएन ढांचे में सुधार करना।

वैश्विक चुनौतियां और रोहिंग्या संकट पर विशेष ध्यान

नए अध्यक्ष ने दुनिया के सामने मौजूद ऊर्जा और सुरक्षा संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इन संकटों ने विकासशील देशों और 'ग्लोबल साउथ' की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। मानवाधिकारों में आ रही गिरावट और सिमटती मानवीय सहायता पर चिंता जताते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वह UN की मानवाधिकार व्यवस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाएंगे।

रहमान ने विशेष रूप से शरणार्थियों और विस्थापित समुदायों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश शरणार्थियों की पीड़ा को भली-भांति समझता है, क्योंकि वह पिछले कई वर्षों से म्यांमार से आए लगभग 12 लाख रोहिंग्या शरणार्थियों को आश्रय दे रहा है।

खास बात: संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80 साल के लंबे इतिहास में अब तक केवल पांच महिलाओं ने ही अध्यक्ष पद संभाला है, जिनमें जर्मनी की पूर्व विदेश मंत्री अनालेना बेयरबॉक का नाम प्रमुखता से शामिल है।

भारत ने दी बधाई: बहुपक्षीय सहयोग की उम्मीद

खलीलुर रहमान के अध्यक्ष निर्वाचित होने पर भारत की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया आई है। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि भारत साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और बहुपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के लिए रहमान के नेतृत्व में मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इसके साथ ही, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथानेनी ने भी नए अध्यक्ष को उनके आगामी कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दीं।

यह चुनाव ऐसे समय में संपन्न हुआ है, जब 193 सदस्य देशों वाली यह महासभा जल्द ही 2027-28 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद (UNSC) के पांच नए अस्थायी सदस्यों का भी चुनाव करने वाली है। ऐसे में खलीलुर रहमान का यह कार्यकाल वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।