ट्रंप की ईरान को सीधी चेतावनी: ‘नाकेबंदी की तरफ आए तो कर देंगे तबाह, ड्रग्स तस्करों जैसा होगा अंजाम’
होर्मुज में अमेरिकी नेवी की सख्त घेराबंदी शुरू; शांति वार्ता विफल होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा ऐलान- 'ईरानी फास्ट अटैक जहाजों को कर देंगे नष्ट'
वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब युद्ध के मुहाने पर पहुँच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि कोई भी ईरानी जहाज अमेरिकी नेवी की नाकेबंदी के करीब आया, तो उसे तुरंत तबाह कर दिया जाएगा। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरानी नौसेना के 'फास्ट अटैक' जहाजों को अब कोई रियायत नहीं दी जाएगी।
होर्मुज में अमेरिका की 'समुद्री घेराबंदी'
अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेश के बाद 'यूएस सेंट्रल कमांड' (CENTCOM) ने सोमवार सुबह से ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों की पूर्ण नाकेबंदी लागू कर दी है।
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नियम: यह नाकेबंदी उन सभी देशों के जहाजों पर लागू होगी जो ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश कर रहे हैं या वहां से बाहर जा रहे हैं।
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छूट: हालांकि, गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने की अनुमति रहेगी।
शांति वार्ता विफल होने का परिणाम
यह तनावपूर्ण कदम पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद उठाया गया है। ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट करते हुए लिखा, "ईरान की नेवी को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा। उनके 158 जहाज पहले ही समुद्र की तली में पड़े हैं। हम किसी भी खतरे को बर्दाश्त नहीं करेंगे।" उन्होंने ईरानी जहाजों की तुलना ड्रग्स तस्करों से करते हुए कहा कि उनका अंजाम भी वैसा ही होगा।
क्या हैं ईरानी 'फास्ट अटैक' शिप्स?
ईरान की 'फास्ट अटैक शिप्स' छोटी लेकिन अत्यंत तीव्र गति वाली हथियारबंद नौकाएं हैं। रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) द्वारा संचालित ये नौकाएं होर्मुज से गुजरने वाले बड़े जहाजों को घेरने और उन पर हमला करने के लिए जानी जाती हैं। ट्रंप ने इन्हें अमेरिकी नेवी के लिए 'बड़ा खतरा' नहीं मानते हुए सीधे हमले की बात कही है।
ईरान का पलटवार: 'अवैध समुद्री डकैती'
दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका की इस नाकेबंदी को 'समुद्री डकैती' करार दिया है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान की सुरक्षा को खतरा हुआ, तो फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी बंदरगाह असुरक्षित हो जाएंगे।
भारत में ईरानी राजदूत का बयान
इधर, भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताअली ने कहा कि उनका देश अभी भी बातचीत के लिए तैयार है, बशर्ते अमेरिका अपनी 'अवैध मांगें' छोड़े और ईरान की शर्तों पर गौर करे। उन्होंने जोर दिया कि इस क्षेत्र के संकट में ईरान और भारत का भविष्य साझा है और वाशिंगटन को ईरान की सैन्य ताकत का अंदाजा है।