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बीजिंग में ट्रंप-शी जिनपिंग की ऐतिहासिक मुलाकात: ईरान युद्ध के साये में शुरू होगा उच्च स्तरीय शिखर सम्मेलन

एलन मस्क और टिम कुक के साथ चीन पहुँचे अमेरिकी राष्ट्रपति; व्यापार, AI और ताइवान पर चर्चा के बीच ईरान संकट सुलझाने में शी जिनपिंग की मदद पर टिकीं नजरें।

 

बीजिंग

 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार शाम बीजिंग पहुँच रहे हैं। पिछले करीब एक दशक में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की यह पहली चीन यात्रा है। यह उच्च स्तरीय शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में ईरान के साथ जारी युद्ध ने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में तनाव पैदा कर दिया है।

टेक दिग्गजों का जमावड़ा और बड़े सौदों की उम्मीद

राष्ट्रपति ट्रंप अकेले चीन नहीं आ रहे हैं; उनके साथ टेस्ला के एलन मस्क और एप्पल के टिम कुक जैसे दुनिया के सबसे बड़े टेक लीडर भी शामिल हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस यात्रा के दौरान व्यापार और टेक्नोलॉजी क्षेत्र में कई बड़े समझौतों की घोषणा हो सकती है। ट्रंप ने रवानगी से पहले उत्साह जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग उनका गर्मजोशी से स्वागत करेंगे।

ईरान युद्ध का साया और ताइवान का मुद्दा

भले ही एजेंडे में व्यापार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ताइवान शामिल हैं, लेकिन ईरान युद्ध की छाया इन वार्ताओं पर गहरी बनी रहेगी। युद्ध अपने तीसरे महीने में प्रवेश कर चुका है और तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, जिससे दुनिया की 20% तेल आपूर्ति खतरे में है।

विशेषज्ञों को डर है कि ईरान संकट को सुलझाने और शी जिनपिंग की मदद पाने के बदले ट्रंप ताइवान के प्रति अमेरिकी समर्थन में ढील दे सकते हैं। हालांकि, व्हाइट हाउस से निकलते समय ट्रंप ने आत्मविश्वास के साथ कहा, "हमें ईरान के मामले में किसी की मदद की जरूरत नहीं है, हम शांति से या किसी भी अन्य तरीके से जीत हासिल करेंगे।"

चीन की भूमिका और कूटनीतिक खिंचाव

ईरान के सबसे बड़े तेल खरीदार के रूप में चीन के पास तेहरान पर दबाव बनाने की ताकत है। पिछले कुछ हफ्तों से अमेरिकी अधिकारी चीन से अपील कर रहे हैं कि वह ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खोलने के लिए मनाए।

दूसरी ओर, बीजिंग ने हाल ही में अमेरिका द्वारा कुछ चीनी कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका का नाम लिए बिना आलोचना करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों को चुनिंदा तरीके से लागू नहीं किया जाना चाहिए और दुनिया को "जंगल राज" की ओर नहीं ले जाना चाहिए।

 14 और 15 मई को होने वाली इस दो दिवसीय वार्ता पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। क्या ट्रंप और शी जिनपिंग मिलकर मध्य पूर्व में शांति का रास्ता निकाल पाएंगे, या ताइवान और व्यापार जैसे मुद्दों पर दोनों महाशक्तियों के बीच दूरियां और बढ़ेंगी? इसका जवाब अगले 48 घंटों में मिल जाएगा।