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ट्रंप का 'रेड कार्पेट वेलकम' तो मिला, पर क्या शी जिनपिंग को मिला वो जो चीन चाहता था

भव्य स्वागत और 'पांडा कूटनीति' के बीच केवल 3 महीने टला ट्रेड वॉर; ताइवान और एआई (AI) सुरक्षा पर बरकरार रहा गतिरोध।

 

भदैनी मिरर डेस्क: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बहुप्रतीक्षित शिखर बैठक समाप्त हो चुकी है। अमेरिका पहुंचे चीनी राष्ट्रपति का वाशिंगटन में भव्य स्वागत किया गया, रेड कार्पेट बिछाया गया और शाही भोज (State Dinner) का आयोजन भी हुआ। हालांकि, इस पूरे तामझाम और सकारात्मक तस्वीरों के पीछे कड़वी सच्चाई यह है कि बीजिंग जिस मुख्य एजेंडे के साथ आया था, उसमें उसे पूर्ण सफलता हासिल नहीं हुई।

चीन का मानना है कि अमेरिका एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में उसके उभार को रोकने का प्रयास कर रहा है। ऐसे में शी जिनपिंग की मंशा व्यापार (Trade), तकनीक (Technology) और ताइवान के मुद्दे पर वाशिंगटन से दीर्घकालिक राहत हासिल करने की थी, जो इस मुलाकात के बाद भी अधूरी दिखती है।

ट्रेड वॉर पर अस्थायी राहत: केवल 3 महीने का 'विराम'

व्यापारिक मोर्चे पर चीन को उम्मीद थी कि अमेरिका के साथ टैरिफ (Tariffs) पर कम से कम एक साल का संघर्षविराम (Truce) मिलेगा। हालांकि, दोनों देशों के बीच सहमति केवल नवंबर से जनवरी (3 महीने) तक के लिए ही बढ़ाई गई है।

  • चीन की मजबूरी: वर्तमान में चीन की घरेलू अर्थव्यवस्था सुस्ती के दौर से गुजर रही है। रियल एस्टेट बाजार में गिरावट और युवा बेरोजगारी के बीच चीन के लिए अपने निर्यात को अमेरिकी टैरिफ से बचाना बेहद जरूरी है।

  • बाकी रहे विवाद: रेयर अर्थ मिनरल्स की सप्लाई चेन, एडवांस्ड अमेरिकी सेमीकंडक्टर चिप्स तक चीन की पहुंच और नए टैरिफ जैसे जटिल मुद्दों को अगले दौर की वार्ता के लिए टाल दिया गया है।

ताइवान की 'लक्ष्मण रेखा' और ट्रंप का रुख

शी जिनपिंग ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि ताइवान को अमेरिकी हथियारों की आपूर्ति चीन के लिए 'लक्ष्मण रेखा' है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस मुद्दे को गलत तरीके से संभालने पर दोनों देशों के बीच सीधे टकराव का खतरा बढ़ सकता है।

  • इससे पहले ट्रंप ने ताइवान को दिए जाने वाले 14 अरब डॉलर के हथियार पैकेज को टालते हुए इसे बेहतर नेगोशिएशन टूल बताया था।

  • हालांकि, ताइवान के समर्थन को लेकर अमेरिका के भीतर भारी राजनीतिक दबाव है, जिसके चलते ट्रंप ने शी जिनपिंग के ताइवान विरोधी बयानों पर अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

AI सुरक्षा पर सहमति का अभाव और 'पांडा कूटनीति'

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के सुरक्षित उपयोग को लेकर दोनों नेताओं के बीच बातचीत तो हुई, लेकिन किसी ठोस समझौते या वैश्विक सम्मेलन पर सहमति नहीं बन सकी। जहां शी जिनपिंग ने एआई को 'मानवी नियंत्रण' में रखने की वकालत की, वहीं ट्रंप ने एआई से मानव अस्तित्व के खतरे की आशंकाओं को खारिज कर दिया।

कूटनीतिक मोर्चे पर चीन ने अपनी मशहूर 'पांडा कूटनीति' (Panda Diplomacy) को आगे बढ़ाते हुए 'पिंग पिंग' और 'फू शुआंग' नाम के दो पांडा अटलांटा चिड़ियाघर को उपहार स्वरूप देने की घोषणा की है।

चीन के लिए क्या रही सबसे बड़ी 'जीत'?

विश्लेषकों के अनुसार, इस शिखर सम्मेलन से बीजिंग के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि उसकी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय छवि रही। हवाई अड्डे पर व्यक्तिगत आगवानी, बॉम्बर जेट्स के फ्लाईपास्ट के बीच शांत दिखते शी जिनपिंग की तस्वीरें और शाही भोज का विवरण चीनी सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से छाया हुआ है। इससे चीन में शी जिनपिंग की छवि ट्रंप के समकक्ष एक मजबूत वैश्विक नेता के रूप में स्थापित हुई है।

बहरहाल, पांडा, रेड कार्पेट और मीठे बोलों के इस कूटनीतिक ड्रामे के बावजूद, दुनिया की दो सबसे बड़ी आर्थिक और सैन्य महाशक्तियों के बीच वर्चस्व की जंग पहले की तरह ही बरकरार है।