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भारत के पड़ोसी क्षेत्र तिब्बत में फिर डोली धरती, बंगाल के अलीपुरद्वार में भी महसूस हुए झटके

नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार तिब्बत में 3.7 और पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार में 3.0 तीव्रता का आया भूकंप; जानें क्या है टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल का पूरा विज्ञान।

 

भारत समेत पूरी दुनिया में लगातार आ रहे भूकंप के झटकों ने लोगों के दिलों में एक गहरा खौफ पैदा कर दिया है। हाल के दिनों में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में आई प्राकृतिक आपदाओं और भूकंपीय घटनाओं के कारण जान-माल का काफी नुकसान हुआ है। इसी बीच, भारत के पड़ोसी क्षेत्र तिब्बत में एक बार फिर शुक्रवार को तड़के धरती कांप उठी।

कितने बजे आया भूकंप और क्या थी तीव्रता?

'नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी' (NCS) द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह 4 बजकर 02 मिनट पर तिब्बत क्षेत्र में भूकंप के झटके दर्ज किए गए। रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 3.7 मापी गई। सिस्मोलॉजी सेंटर के मुताबिक, इस भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 30 किलोमीटर की गहराई में स्थित था।

गौरतलब है कि तिब्बत और आसपास का हिमालयी बेल्ट पिछले कुछ दिनों से लगातार भूगर्भीय गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। इससे पहले 8 सितंबर को भी तिब्बत क्षेत्र में 5.3 तीव्रता का मध्यम स्तर का भूकंप आया था, जिसके झटके नेपाल और भारत के सीमावर्ती इलाकों तक महसूस किए गए थे। इसके अलावा शुक्रवार को ही अफगानिस्तान में भी 3.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिसका केंद्र 163 किमी की गहराई में था।

पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार में भी कांपी जमीन

तिब्बत में तड़के आए झटकों के कुछ ही घंटों बाद भारत के पश्चिम बंगाल राज्य में भी हल्की कंपन्न महसूस की गई। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार, शुक्रवार सुबह 6 बजकर 56 मिनट पर उत्तर बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में भूकंप का झटका लगा। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.0 दर्ज की गई और इसका केंद्र सतह से महज 9 किलोमीटर नीचे था। हालांकि, तीव्रता कम होने के कारण किसी प्रकार के बड़े नुकसान या हताहत होने की खबर नहीं है।

आखिर क्यों आते हैं बार-बार भूकंप?

पृथ्वी की ऊपरी सतह मुख्य रूप से कई बड़े और छोटे टुकड़ों में बंटी हुई है, जिन्हें टेक्टोनिक प्लेट्स (Tectonic Plates) कहा जाता है।

  • प्लेटों का टकराव और घर्षण: ये टेक्टोनिक प्लेट्स बेहद धीमी गति से लगातार तैरती या खिसकती रहती हैं। जब दो प्लेटें आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे के नीचे धंसती हैं या आपस में रगड़ खाती हैं, तो उनके जोड़ों (Fault Lines) पर अत्यधिक दबाव और ऊर्जा जमा होने लगती है।

  • ऊर्जा का अचानक निकलना: जब यह दबाव सीमा से अधिक हो जाता है, तो भूगर्भीय ऊर्जा अचानक तरंगों (Seismic Waves) के रूप में बाहर निकलती है। यही तरंगें जब पृथ्वी की ऊपरी सतह तक पहुँचती हैं, तो हमें भूकंप के झटके महसूस होते हैं।

हिमालयी क्षेत्र में क्यों है ज्यादा खतरा?

भारतीय प्लेट लगातार उत्तर दिशा की ओर खिसक रही है और यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है। इसी टकराहट के कारण हिमालय पर्वत श्रृंखला का निर्माण हुआ है और यही वजह है कि तिब्बत, नेपाल, उत्तर-पूर्वी भारत और उत्तर भारत के हिमालयी इलाके भूकंप के लिहाज से अति-संवेदनशील (High Seismic Hazard Zone) माने जाते हैं।

कम तीव्रता के भूकंप अक्सर कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन यह इस बात का संकेत होते हैं कि धरती के नीचे की प्लेटें लगातार दबाव बना रही हैं।