होर्मुज संकट का असर: श्रीलंका में पेट्रोल 398 रुपये पार, महंगाई बढ़ने का खतरा
पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के चलते श्रीलंका में ईंधन कीमतों में 25% तक उछाल, ट्रांसपोर्ट और आम जनता पर सीधा असर।
कोलंबो/डेस्क। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक तेल आपूर्ति में आई बाधा का असर अब श्रीलंका की अर्थव्यवस्था पर साफ नजर आने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच श्रीलंका सरकार ने ईंधन की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें आधी रात से लागू कर दी गईं।
यह एक हफ्ते में दूसरी और 1 मार्च के बाद तीसरी बार ईंधन कीमतों में वृद्धि है, जिससे देश में महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका है।
कितना महंगा हुआ ईंधन?
नई दरों के अनुसार—
- ऑटो डीजल: 303 → 382 श्रीलंकाई रुपये (+79)
- सुपर डीजल: 353 → 443 रुपये (+90)
- पेट्रोल 92 ऑक्टेन: 317 → 398 रुपये (+81)
- पेट्रोल 95 ऑक्टेन: 365 → 455 रुपये (+90)
- केरोसीन: 195 → 255 रुपये (+60)
यानी लगभग सभी ईंधन श्रेणियों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
क्यों बढ़े दाम?
ईंधन कीमतों में इस उछाल की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता युद्ध है। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई से खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर है।
खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल गुजरता है, प्रभावित हुआ है।
इससे वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई और तेल कीमतों में तेजी आई।
ट्रांसपोर्ट और आम जनता पर असर
ईंधन महंगा होने का सबसे ज्यादा असर परिवहन क्षेत्र पर पड़ा है—
- निजी बस ऑपरेटरों ने 15% किराया बढ़ाने की मांग की
- चेतावनी: किराया न बढ़ा तो 90% बसें बंद हो सकती हैं
- ऑटो और थ्री-व्हीलर चालकों ने भी किराया बढ़ाने के संकेत दिए
इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
सरकार का पक्ष और बढ़ती चिंता
श्रीलंका सरकार का कहना है कि वह अब भी ईंधन पर भारी सब्सिडी दे रही है और हर महीने बड़ा आर्थिक बोझ उठा रही है। अगर कीमतें नहीं बढ़ाई जातीं, तो देश पर अरबों डॉलर का अतिरिक्त दबाव पड़ता।
हालांकि, आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि- इस फैसले से महंगाई दर 5 से 8 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
क्या फिर लौटेगा 2022 जैसा संकट?
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ती कीमतें और वैश्विक अस्थिरता के चलते श्रीलंका एक बार फिर 2022 जैसे आर्थिक संकट की ओर बढ़ सकता है।
यदि हालात नहीं सुधरे, तो देश की आर्थिक स्थिति और गंभीर हो सकती है।