डॉलर और युआन के मुकाबले निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, जानें गिरावट की बड़ी वजहें
डॉलर के मुकाबले ₹88.15 पर बंद हुआ रुपया, अब तक का ऑल-टाइम लो
Aug 29, 2025, 15:45 IST
युआन के मुकाबले भी रिकॉर्ड कमजोरी, चार महीनों में 6% गिरा रुपया
अमेरिका के 50% टैरिफ और FII सेलिंग से निवेशकों का भरोसा डगमगाया
टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और केमिकल सेक्टर को मिल सकती है अस्थायी राहत
भारतीय रुपया शुक्रवार को इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। डॉलर के मुकाबले रुपया ₹88.15 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो अब तक का ऑल-टाइम लो है। वहीं, ऑफशोर चीनी युआन के मुकाबले भी रुपया 12.33 तक गिरा, जो इस हफ्ते में 1.2% और इस महीने में 1.6% की गिरावट दर्शाता है। पिछले चार महीनों में रुपया युआन के मुकाबले करीब 6% कमजोर हुआ है।
आज के कारोबार में क्या हुआ
शुक्रवार को रुपया दिनभर में 0.5% गिरा, जो हाल के दिनों की सबसे तेज गिरावट मानी जा रही है। इस साल अब तक रुपया 3% कमजोर हुआ है और एशिया की सबसे कमजोर करेंसी साबित हो रहा है।
गिरावट की वजहें
- अमेरिका द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाने से निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ।
- लगातार विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली से डॉलर की मांग बढ़ी।
- कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और ग्लोबल अनिश्चितता ने दबाव और बढ़ा दिया।
युआन के मुकाबले क्यों कमजोर हुआ रुपया
अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया है जबकि चीन के प्रोडक्ट्स पर केवल 30% टैक्स है। इससे निवेशकों को लग रहा है कि भारत के एक्सपोर्टर्स पर ज्यादा दबाव पड़ेगा। हालांकि, रुपया-युआन रेट बदलने से भारत के प्रोडक्ट्स चीनी सामान से सस्ते हो जाएंगे, जो कुछ हद तक राहत दे सकता है।
किन सेक्टर्स पर असर
टेक्सटाइल्स, इंजीनियरिंग गुड्स और केमिकल सेक्टर्स में भारत-चीन की सीधी टक्कर है। कमजोर रुपया इन सेक्टर्स को कॉम्पिटिटिव बना सकता है। लंबी अवधि में इससे भारत-चीन ट्रेड डेफिसिट घटने की संभावना है।
RBI का नजरिया
विशेषज्ञों का मानना है कि RBI फिलहाल इसे कंट्रोल में मान रहा है क्योंकि डॉलर के मुकाबले रुपया 88 से ऊपर नहीं गया है (रिकॉर्ड लो 87.95 है)। यानी रुपया कमजोर जरूर है लेकिन अभी स्थिति बिगड़ी नहीं है।
निवेशकों के लिए मायने
- शॉर्ट टर्म में टेक्सटाइल, केमिकल और इंजीनियरिंग कंपनियों के शेयरों को राहत मिल सकती है।
- अगर अमेरिकी टैरिफ का दबाव जारी रहा तो लॉन्ग-टर्म में तनाव बढ़ सकता है।
- डॉलर के मुकाबले 88 का लेवल अहम सपोर्ट है, इसके नीचे जाने पर बाजार में करंसी दबाव और बढ़ सकता है।