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सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की बढ़ी बेचैनी: SCO समिट में शहबाज शरीफ के पानी वाले बयान पर गरमाई सियासत

किर्गिस्तान में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन में PAK पीएम ने उठाया पानी का मुद्दा, भारत के सख्त रुख और बीजेपी की प्रतिक्रिया पर गरमाया माहौल

 

भारत के साथ सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) पर जारी कड़े रुख के बीच पाकिस्तान की चिंताएं अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी खुलकर सामने आने लगी हैं। किर्गिस्तान में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पानी के संकट और इस समझौते को लेकर अपनी बात रखी। उनके इस बयान के बाद देश-विदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है, और सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

SCO समिट में छलका पाकिस्तान का दर्द

किर्गिस्तान में चल रहे SCO सम्मेलन में भाग लेते हुए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में पानी के मुद्दों पर जोर दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर भी अपने बयान से जुड़ी जानकारी साझा की। उनके इस बयान और लहजे को भारत में काफी चर्चा का विषय बनाया गया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो रील शेयर करते हुए इस पर तीखा तंज कसा, जिसके बाद से यह मामला ट्रेंडिंग टॉपिक बन गया है।

विश्लेषकों का मानना है कि भारत की ओर से सिंधु जल समझौते को लेकर उठाए गए कड़े कदमों ने पाकिस्तान की कृषि और अर्थव्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है, क्योंकि पाकिस्तान के लगभग 80 प्रतिशत कृषि क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति इसी संधि के माध्यम से सुनिश्चित होती है।

क्या है सिंधु जल संधि विवाद और पृष्ठभूमि?

भारत ने पिछले साल द्विपक्षीय तनाव के बीच इस ऐतिहासिक संधि को निलंबित कर दिया था। यह बड़ा कदम कश्मीर में हुए एक आतंकी हमले के बाद उठाया गया था, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी। जांच में सामने आया था कि उस हमले में शामिल हमलावरों में से दो पाकिस्तानी नागरिक थे। हालांकि पाकिस्तान ने हमले में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया था, लेकिन भारत ने इसके बाद कड़ा रुख अपनाते हुए जलाशय क्षमता बढ़ाने के लिए कश्मीर में दो पनबिजली परियोजनाओं पर काम तेज कर दिया।

यह पहला मौका था जब 1960 से चली आ रही इस संधि के दायरे से बाहर जाकर भारत ने कड़े कदम उठाए, जबकि दोनों देशों के बीच तीन बड़े युद्धों और कई संघर्षों के बावजूद अब तक इस संधि का पालन होता रहा था। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने इस मामले में द हेग स्थित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (PCA) का दरवाजा खटखटाया था। पीसीए ने अपने हालिया आदेश में कहा है कि भारत को जल बंटवारे की इस संधि का पालन करना चाहिए और जम्मू-कश्मीर में बनाए जा रहे पनबिजली संयंत्र पर काम सीमित रखना चाहिए। हालांकि, भारत के रुख और अंतरराष्ट्रीय मंचों की प्रासंगिकता को लेकर विशेषज्ञों के बीच अलग-अलग राय बनी हुई है, लेकिन पाकिस्तान की ओर से लगातार बढ़ती गुहार यह साफ करती है कि जल संकट वहां के हुक्मरानों के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन चुका है।