UNSC में भारत की दावेदारी से फिर घबराया पाकिस्तान, शहबाज शरीफ के दूत ने यूएन में जताया डर
G4 देशों की मांग को बताया 'अव्यावहारिक', भारत से क्यों डरता है पाकिस्तान?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता के मजबूत होते दावे से पाकिस्तान एक बार फिर बौखला गया है। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत आसिम इफ्तिखार अहमद ने भारत की दावेदारी का विरोध करते हुए कहा है कि उनके पड़ोसी देश (भारत) के पास सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट का दावा करने की 'कोई योग्यता नहीं' है।
पाकिस्तान टीवी डिजिटल के एक टॉक शो में बोलते हुए पाकिस्तानी दूत ने दावा किया कि सुरक्षा परिषद में सीट चाहने वाले देशों के वोटिंग रिकॉर्ड, यूएन के पिछले प्रस्तावों के पालन और यूएन चार्टर के प्रति उनकी निष्ठा की जांच की जानी चाहिए।
G4 देशों की मांग को बताया 'अव्यावहारिक'
पाकिस्तानी दूत आसिम इफ्तिखार ने भारत, जर्मनी, जापान और ब्राजील के G4 समूह द्वारा सुरक्षा परिषद में नई स्थायी सीटों की मांग पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि G4 देशों की ओर से की जा रही यह मांग ही पिछले दो दशकों से सुरक्षा परिषद में सुधारों की प्रक्रिया में सबसे बड़ी रुकावट बनी हुई है। उन्होंने इस मांग को विशेषाधिकार चाहने की अनुचित और अव्यावहारिक कोशिश करार दिया।
वीटो पावर पर बोलते हुए पाकिस्तानी दूत ने कहा कि गाजा और यूक्रेन जैसे संकटों पर सुरक्षा परिषद का ठप होना पांच स्थायी सदस्यों (P-5) के वीटो पावर का ही नतीजा है। ऐसे में अगर स्थायी सदस्यों और वीटो पावर की संख्या बढ़ाई गई तो समस्याएं कम होने के बजाय और बढ़ेंगी।
भारत से क्यों डरता है पाकिस्तान?
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान की इस घबराहट के पीछे मुख्य वजह यह है कि भारत के UNSC का स्थायी सदस्य बनने से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर नकेल कसना बेहद आसान हो जाएगा। इसके अलावा, वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान की अवैध गतिविधियों (जैसे यूएन आपत्तियों के बावजूद हथियार सप्लाई) पर भारत का कड़ा रुख पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती बन जाएगा।
P-5 में चीन को छोड़कर बाकी सभी देश भारत के साथ
21वीं सदी की वैश्विक वास्तविकताओं को देखते हुए भारत लगातार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार और सुधार की वकालत कर रहा है। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र, सबसे अधिक आबादी वाला देश और पांचवीं सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था होने के नाते भारत की दावेदारी बेहद मजबूत है।
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वैश्विक समर्थन: सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में से चार देश— अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस —भारत की स्थायी सदस्यता का खुलकर समर्थन करते हैं।
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चीन बना रोड़ा: केवल चीन ही एकमात्र ऐसा देश है जो वीटो पावर का इस्तेमाल कर भारत के मार्ग में लगातार अड़ंगा लगाता आ रहा है।