Middle East Crisis: कतर में बातचीत के बीच अमेरिका ने ईरान के मिसाइल ठिकानों पर किया हमला, बैकफुट पर इजरायल
ट्रंप प्रशासन और ईरान की सीक्रेट डील से बाहर हुए नेतन्याहू, इजरायली मीडिया ने कहा- 'ईरान ने परमाणु बम बनाया तो वह बीबी (Bibi) का बम होगा'
वॉशिंगटन/तेहरान: मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी तनाव के बीच एक बहुत बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। एक तरफ जहां कतर में ईरान के वार्ताकार शांति वार्ता के लिए बातचीत की मेज पर हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने ईरान के मिसाइल ठिकानों पर हमले किए हैं। इस सैन्य एक्शन के बीच सबसे चौंकाने वाली खबर यह है कि इस पूरे युद्ध को हवा देने वाला इजरायल अब अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत से पूरी तरह अलग-थलग (लॉक आउट) हो गया है।
नेतन्याहू की जिद पड़ी इजरायल पर भारी, अमेरिका में खोया समर्थन
युद्ध की शुरुआत में ही इजरायल के सुरक्षा विशेषज्ञों और संभ्रांत वर्ग (Security Elite) ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को चेतावनी दी थी कि ईरान में सत्ता परिवर्तन (Regime Change) की जिद और घरेलू राजनीति (अक्टूबर में होने वाले चुनाव) में फायदा लेने की कोशिश, इजरायल के सबसे बड़े विदेशी कूटनीतिक एसेट को बर्बाद कर देगी। वह एसेट है- अमेरिका में इजरायल को मिलने वाला 'द्विदलीय समर्थन' (Bi-partisan Support)।
युद्ध के करीब तीन महीने बीतने के बाद, अमेरिकी जनमत संग्रह (Opinion Polls) के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि इजरायल ने दशकों पुराने इस भरोसे को खो दिया है, जो इस युद्ध का सबसे स्थायी और नुकसानदेह परिणाम साबित हो सकता है।
ईरान से बातचीत में इजरायल 'अछूत', न्यूयॉर्क टाइम्स का दावा
प्रतिष्ठित अमेरिकी अखबार 'न्यूजॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताओं से इजरायल को न सिर्फ बाहर रखा गया है, बल्कि इजरायली सरकार को इसकी प्रगति (प्रोग्रेस) को लेकर कोई अपडेट भी नहीं दिया जा रहा है। हालात ये हैं कि नेतन्याहू सरकार को ईरान के नेतृत्व की जासूसी करने के लिए अब अपने क्षेत्रीय सहयोगियों और उनके जासूसी नेटवर्क (Espionage Networks) पर निर्भर होना पड़ रहा है।
ओबामा की 2015 की डील से कमजोर होगी ट्रंप की नई डील
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टीम इस समय ईरान के साथ जिस नए समझौते पर बातचीत कर रही है, वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कुछ प्रतिबंध तो जरूर लगाएगा, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह समझौता साल 2015 में बराक ओबामा प्रशासन द्वारा किए गए 'ज्वाइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन' (JCPOA) समझौते की तुलना में काफी कमजोर और कम प्रतिबंधात्मक होगा। गौरतलब है कि बेंजामिन नेतन्याहू ने वाशिंगटन जाकर ओबामा की उस न्यूक्लियर डील की तीखी आलोचना की थी।
इजरायली मीडिया ने घेरा- "परमाणु बम बना तो वह 'बीबी' का बम होगा"
इस कूटनीतिक विफलता को लेकर इजरायल के भीतर ही नेतन्याहू की चौतरफा थू-थू हो रही है। इजरायली अखबार 'माआरिव' (Ma'ariv) में रक्षा विशेषज्ञ बेन कास्पिट ने लिखा है, "सामने आ रहा नया समझौता पिछले समझौते से कहीं अधिक बदतर है। युद्ध और युद्धविराम के इस चक्र से ईरान का परमाणु कार्यक्रम तबाह होने के बजाय और तेजी से आगे बढ़ सकता है।"
उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री पर हमला बोलते हुए लिखा, "अगर ईरान अंततः परमाणु बम बनाने में कामयाब हो जाता है, तो याद रखा जाए कि वह 'बीबी' (बेंजामिन नेतन्याहू का निकनेम) का बम होगा।" नेतन्याहू ने देश से वादा किया था कि वह ईरान के परमाणु ठिकानों को नेस्तनाबूद कर देंगे, लेकिन हकीकत में इजरायल पूरी तरह अलग-थलग पड़ता दिख रहा है।