Israel-Iran War: इजरायल ने ईरान के तालेकान न्यूक्लियर कंपाउंड पर किया हमला, तेहरान में जोरदार धमाके; खाड़ी में बढ़ा तनाव
मिडिल ईस्ट में युद्ध तेज, ईरान की कड़ी चेतावनी—फारस की खाड़ी के द्वीपों पर हमला हुआ तो ‘कोई संयम नहीं’; तेल आपूर्ति और वैश्विक बाजार प्रभावित
नई दिल्ली। मध्य पूर्व में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। गुरुवार को इजरायल ने ईरान के तालेकान न्यूक्लियर कंपाउंड को निशाना बनाकर हमला किया, जिसके बाद राजधानी तेहरान में कई जोरदार धमाके सुनाई दिए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शहर के पश्चिमी हिस्से से धुएं के घने गुबार उठते देखे गए, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई।
28 फरवरी से शुरू हुआ युद्ध
इस युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसके बाद से ईरान लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए जवाबी कार्रवाई कर रहा है। इस संघर्ष ने पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर कर दिया है और कई देशों की सुरक्षा पर असर पड़ रहा है।
ईरान की कड़ी चेतावनी
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका और इजरायल को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अगर फारस की खाड़ी में स्थित ईरानी द्वीपों पर हमला किया गया तो तेहरान किसी भी तरह का संयम नहीं बरतेगा।
गालिबाफ ने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर सीमा पार करने को तैयार है और अगर ईरानी जमीन पर हमला हुआ तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
खार्ग द्वीप पर बढ़ा खतरा
रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने संघर्ष बढ़ने की स्थिति में खार्ग द्वीप पर कब्जा करने की संभावना पर विचार किया है। यह द्वीप ईरान के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि देश के तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा यहीं से होता है।
फारस की खाड़ी में जहाज पर हमला
ईरानी सेना ने दावा किया है कि उसने फारस की खाड़ी के उत्तरी हिस्से में एक जहाज को निशाना बनाया। बताया जा रहा है कि जहाज पर मार्शल द्वीपसमूह का झंडा लगा था, लेकिन ईरान का कहना है कि यह जहाज अमेरिकी स्वामित्व वाला था।
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अपने आधिकारिक पोर्टल सेपाह न्यूज पर कहा कि “सेफसी” नामक इस जहाज को चेतावनी देने के बाद भी निर्देशों का पालन नहीं करने पर निशाना बनाया गया।
इराक में सैन्य ठिकाने पर हमला
इस बीच इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में स्थित एक इतालवी सैन्य अड्डे पर भी हमला हुआ है। एरबिल के पास स्थित कैंप सिंगारा में हुए इस हमले से बेस की कुछ इमारतों और उपकरणों को नुकसान पहुंचा है, हालांकि किसी सैनिक के घायल होने की खबर नहीं है।
इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। अधिकारियों के अनुसार यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमला ड्रोन से किया गया या मिसाइल से।
वैश्विक तेल बाजार पर असर
मध्य पूर्व में बढ़ते इस युद्ध का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार खाड़ी देशों ने तेल उत्पादन में भारी कटौती की है, जिससे वैश्विक आपूर्ति में बड़ी गिरावट आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक कच्चे तेल का उत्पादन करीब 80 लाख बैरल प्रतिदिन कम हो गया है, जबकि लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा दबाव
युद्ध के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव और बढ़ा तो इसका असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार पर और गंभीर हो सकता है।
फिलहाल मध्य पूर्व में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं और यह संघर्ष अभी खत्म होने के कोई संकेत नहीं दिखा रहा है।