ईरान की आखिरी चेतावनी: होर्मुज से पीछे हटा अमेरिकी जंगी जहाज, ट्रंप बोले- 'खत्म करने को तैयार'
पाकिस्तान वार्ता विफल होने के बाद तनाव चरम पर
अंतरराष्ट्रीय डेस्क (भदैनी मिरर): खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के बादल गहरे होते जा रहे हैं। इस्लामाबाद में हुई 21 घंटे की ऐतिहासिक शांति वार्ता के विफल होने के बाद दोनों देश अब आमने-सामने हैं। रविवार को ईरान ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि उसने होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) में अपनी क्रूज मिसाइलों और ड्रोनों के दम पर अमेरिकी नौसेना के एक जंगी जहाज को खदेड़ दिया है।
30 मिनट का अल्टीमेटम और मिसाइलें तैनात
ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर 'प्रेस टीवी' के अनुसार, अमेरिकी नेवी का विध्वंसक जहाज होर्मुज में ईरान द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने की कोशिश कर रहा था। ईरानी सेना ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए 'आखिरी चेतावनी' जारी की। सूत्रों के अनुसार, ईरान ने हमलावर ड्रोन और क्रूज मिसाइलें पूरी तरह तैयार कर ली थीं। 30 मिनट की समय-सीमा मिलते ही अमेरिकी जहाज को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र की ओर पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा।
ट्रंप का कड़ा रुख: "ईरान को खत्म करने को तैयार है अमेरिका"
इधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान वार्ता की विफलता के बाद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। ट्रंप ने नौसेना को होर्मुज में तत्काल नाकेबंदी शुरू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरान को अवैध टोल (शुल्क) चुकाने वाले किसी भी जहाज को बख्शा नहीं जाएगा। ट्रंप ने कड़े शब्दों में कहा, "वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका उपयुक्त समय पर ईरान को खत्म करने के लिए पूरी तरह तैयार है।"
क्यों विफल हुई इस्लामाबाद वार्ता?
पाकिस्तान में हुई इस ऐतिहासिक शांति वार्ता का नेतृत्व अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) कर रहे थे। वेंस के अनुसार, अमेरिका ने अपना 'सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव' रखा था, लेकिन तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने की शर्त पर तैयार नहीं हुआ। इस गतिरोध के कारण दो सप्ताह के नाजुक युद्धविराम पर अब खतरा मंडराने लगा है।
नाकेबंदी से बढ़ेगा वैश्विक संकट
अमेरिका द्वारा होर्मुज में जहाजों के प्रवेश और निकास को रोकने के लिए की जाने वाली नाकेबंदी से वैश्विक तेल आपूर्ति पर गहरा असर पड़ सकता है। फिलहाल दोनों देश एक-दूसरे पर वार्ता विफल करने का आरोप लगा रहे हैं, जिससे खाड़ी क्षेत्र में कभी भी भीषण युद्ध छिड़ने की आशंका बनी हुई है।