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जिनेवा में भारत की लोकतांत्रिक सोच की सराहना, UNHRC प्रमुख वोल्कर तुर्क बोले- 'छात्र प्रदर्शनों से निपटने का संवाद मॉडल सबसे बेहतरीन'

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने जिनेवा में आयोजित UNHRC के 63वें सत्र के दौरान भारत के 'संवाद मॉडल' की जमकर तारीफ की है। वहीं, विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए चीन और पाकिस्तान के रवैये पर कड़ी चिंता जताई गई है।

 

जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 63वें सत्र के दौरान भारत की लोकतांत्रिक कार्यशैली और संवाद की नीति की वैश्विक मंच पर खुलकर सराहना की गई है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने नई दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन पर भारत की प्रतिक्रिया की तारीफ करते हुए इसे अन्य देशों के लिए एक बेहतरीन मिसाल बताया।

सोमवार को जिनेवा में सत्र को संबोधित करते हुए तुर्क ने कहा कि सरकारों को सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों और युवाओं के नेतृत्व वाले आंदोलनों से निपटने के लिए बल प्रयोग की बजाय बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के हालिया विरोध प्रदर्शनों ने यह साबित कर दिया है कि युवा नेताओं के साथ संवाद करना, बल के अत्यधिक प्रयोग की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी और सकारात्मक तरीका है। उनके अनुसार, शांतिपूर्ण विरोध, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सूचना तक पहुंच का अधिकार सरकार और नागरिकों के बीच विश्वास कायम करने के लिए अनिवार्य है।

चीन और पाकिस्तान पर बरसे मानवाधिकार प्रमुख

एक तरफ जहां संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने भारत के 'संवाद मॉडल' की सराहना की, वहीं दूसरी तरफ चीन और पाकिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की। उन्होंने इन देशों पर विरोध प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबाने और मानवाधिकारों का हनन करने का कड़ा आरोप लगाया।

तुर्क ने पाकिस्तान का जिक्र करते हुए कहा कि वहां के अधिकारियों ने विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए "अत्यधिक घातक बल और मनमाने ढंग से लोगों को हिरासत में लेने" की नीति अपनाई है, जो कि बेहद निंदनीय है।

इसके साथ ही, उन्होंने चीन पर भी शिकंजा कसते हुए शिनजियांग उइघुर स्वायत्त क्षेत्र में मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता जताई। तुर्क ने चीनी अधिकारियों से राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी कानूनों की समीक्षा करने, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा यातना जैसे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच करने की पुरजोर मांग की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने तिब्बत में स्थानीय लोगों के अधिकारों और उनकी धार्मिक स्वतंत्रता पर बढ़ती पाबंदियों को तुरंत बदलने का आग्रह किया।

अन्य देशों की दमनकारी नीतियों पर भी निशाना

जिनेवा के इस मंच से वोल्कर तुर्क ने दुनिया के कई अन्य देशों में नागरिक स्वतंत्रता के हनन पर भी आवाज उठाई। उन्होंने ईरानी अधिकारियों द्वारा दमन तेज करने और फांसी की सजा में भारी वृद्धि का हवाला दिया। साथ ही, निकारागुआ में विपक्षी दलों पर प्रतिबंध, रूस में राजनीतिक विरोध को दबाने, तथा अजरबैजान, जॉर्जिया, ट्यूनीशिया और युगांडा जैसे देशों में मीडिया की स्वतंत्रता और नागरिक स्वतंत्रताओं पर बढ़ती पाबंदियों की ओर भी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया।

कुल मिलाकर, इस वैश्विक बैठक में भारत की लोकतांत्रिक सोच और संवाद आधारित दृष्टिकोण को जहां एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में सराहा गया, वहीं पाकिस्तान और चीन जैसे देशों में प्रदर्शनकारियों पर हो रहे जुल्म और मानवाधिकारों के हनन की पोल खुलकर सामने आ गई।