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पाकिस्तान में भारत के दुश्मनों का 'द एंड': हाफिज सईद का करीबी यूसुफ अफरीदी ढेर, 'अज्ञात हमलावरों' के खौफ से कांपा लश्कर

साल 2026 में अब तक 30 से अधिक खूंखार आतंकियों को 'अज्ञात' लोगों ने पहुंचाया जहन्नुम

 

इस्लामाबाद: पाकिस्तान, जो लंबे समय तक भारत विरोधी आतंकियों के लिए 'सेफ हेवन' माना जाता था, अब उन्हीं के लिए कब्रगाह बनता जा रहा है। मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के बेहद करीबी और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के रणनीतिकार शेख यूसुफ अफरीदी की रहस्यमयी तरीके से हत्या कर दी गई है। यह घटना पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के लांडी कोतल इलाके में रविवार (26 अप्रैल 2026) को हुई।

अंधाधुंध फायरिंग में हुआ अफरीदी का खात्मा

जानकारी के अनुसार, यूसुफ अफरीदी जब लांडी कोतल में था, तभी मोटरसाइकिल सवार अज्ञात हमलावरों ने उस पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। मौके पर ही उसने दम तोड़ दिया। अफरीदी न केवल लश्कर के लिए युवाओं की भर्ती करता था, बल्कि वह संगठन की अहल-ए-हदीस विचारधारा का प्रमुख चेहरा भी था।

अमीर हमजा पर भी हुआ था हमला

अफरीदी की मौत से ठीक एक सप्ताह पहले लाहौर में लश्कर के सह-संस्थापक अमीर हमजा पर भी घातक हमला हुआ था। हालांकि हमजा इस हमले में गंभीर रूप से घायल हो गया, लेकिन इस हमले ने साबित कर दिया कि पाकिस्तान के सबसे सुरक्षित शहरों में भी अब भारत के दुश्मन महफूज नहीं हैं।

'अज्ञात हमलावरों' का बढ़ता ग्राफ

पिछले एक साल में आतंकियों के सफाए का एक खास पैटर्न देखने को मिला है। साल 2026 के शुरुआती महीनों में ही लश्कर, जैश और हिज्बुल मुजाहिदीन से जुड़े 30 से अधिक आतंकी निशाना बनाए जा चुके हैं। इनमें से कुछ प्रमुख नाम हैं:

  • अदनान अहमद (हंजला): कराची में मारा गया हाफिज का दाहिना हाथ।

  • ख्वाजा शाहिद: पठानकोट हमले का मास्टरमाइंड, पीओके में मिला सिर कटा शव।

  • अकरम गाजी: लश्कर का पूर्व कमांडर।

  • शाहिद लतीफ: जैश-ए-मोहम्मद का अहम हैंडलर।

क्यों मारे जा रहे हैं आतंकी? तीन बड़ी थ्योरीज:

रक्षा विशेषज्ञों के बीच इन हत्याओं को लेकर तीन प्रमुख कयास लगाए जा रहे हैं:

  1. आपसी रंजिश: आतंकी संगठनों (LeT, JeM, TTP) के बीच फंडिंग और प्रभाव को लेकर खूनी गैंगवार।

  2. ISI का 'क्लीन-अप' ऑपरेशन: FATF के दबाव के चलते पाकिस्तान खुद उन मोहरों को हटा रहा है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके लिए बोझ बन चुके हैं।

  3. स्थानीय आक्रोश: आतंकियों द्वारा स्थानीय संसाधनों पर कब्जे के कारण कबीलाई इलाकों में उनके खिलाफ बढ़ता गुस्सा।

आतंकी नेटवर्क में हड़कंप

लाहौर और खैबर पख्तूनख्वा जैसे इलाकों में आतंकियों का इस तरह सरेआम मारा जाना उनके आकाओं के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। हाफिज सईद फिलहाल जेल में बंद है, लेकिन उसके नेटवर्क के एक-एक कर खत्म होने से आतंकियों में यह डर बैठ गया है कि उनकी हर हरकत पर किसी 'अदृश्य' ताकत की नजर है।