नेपाल-चीन सीमा पर ग्लेशियर फटने से भीषण तबाही: 750 से अधिक शव मिले, 3000 से ज्यादा लोग अब भी लापता;4 अरब डॉलर से अधिक के नुकसान की आशंका
त्रिशूली और भोटेकोशी नदियों में आई बाढ़ से कई गांव जमींदोज; 900 से अधिक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट कर्मी सुरंगों में फंसे, भारत-चीन से मांगी गई मदद।
काठमांडू (भदैनी मिरर): नेपाल और चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की सीमा पर स्थित हिमाच्छादित पहाड़ों में ग्लेशियर फटने (Glacier Collapse) से आई प्रलयंकारी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। बुधवार को हुए इस हादसे में अब तक नेपाल और चीन मिलाकर 750 से अधिक लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 3,000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं।
बाढ़ का वेग इतना तेज था कि त्रिशूली और भोटेकोशी नदी प्रणालियों के किनारे बसे दर्जनों गांव और कस्बे देखते ही देखते मलबे में तब्दील हो गए। शव बहकर सीमा पार भारत के निचले इलाकों तक पहुंच रहे हैं, जिससे नेपाल के अस्पतालों और शवगृहों (Morgues) में जगह कम पड़ने लगी है।
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में फंसे 900 से ज्यादा मजदूर
आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिले हुए हैं। 'इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन' के अनुसार, 11 जलविद्युत परियोजनाओं (Hydropower Projects) के निर्माण स्थलों और सुरंगों में काम कर रहे करीब 933 मजदूर लापता या फंसे हुए हैं। इनमें नेपाल, भारत, चीन और दक्षिण कोरिया के नागरिक शामिल हैं।
रसुवा स्थित 22 मेगावाट की चिलिमे जलविद्युत परियोजना की सुरंगें पूरी तरह कीचड़ और मलबे से भर गई हैं। नेपाल सेना और सशस्त्र पुलिस बल के जवानों सहित 19,000 सुरक्षाकर्मी और 16 हेलीकॉप्टर राहत कार्य में लगे हैं। भारत से भी 11 सदस्यीय मेडिकल और टनल-रेस्क्यू विशेषज्ञ टीम हवाई आकलन और रेस्क्यू के लिए नेपाल पहुंच चुकी है।
लापता लोगों का आधिकारिक आंकड़ा:
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नेपाल में कुल लापता: 2,498 लोग (जिनमें 589 विदेशी पर्यटक और 127 स्थानीय गाइड शामिल हैं)।
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चीन के तिब्बत क्षेत्र में लापता: 261 विदेशी नागरिक (23 देशों के, जिनमें 104 नेपाली और 49 भारतीय शामिल हैं)।
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सुरक्षाकर्मी: नेपाल सेना के 45, नेपाल पुलिस के 27 और सशस्त्र पुलिस बल के 13 जवान भी लापता हैं।
कृत्रिम झील (Barrier Lake) का खतरा और रेस्क्यू में बाधा
बाढ़ के मलबे से नदी के ऊपरी प्रवाह क्षेत्र (ग्यिरोंग पोर्ट के पास) में एक अस्थायी झील बन गई थी, जिससे दोबारा बाढ़ का खतरा पैदा हो गया था। हालांकि, उपग्रहों और ड्रोन की निगरानी के बाद स्थिति को नियंत्रण में बताया गया है। इसके बावजूद, नए सिरे से हुई बारिश और नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन बार-बार प्रभावित हो रहा है।
4 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान, वैश्विक मदद जारी
नेपाल के वित्त मंत्री के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा से देश को 4 अरब डॉलर (लगभग 33,000 करोड़ रुपये) से अधिक का नुकसान हुआ है। दर्जनों किलोमीटर सड़कें और मुख्य पुल पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं।
आपदा की गंभीरता को देखते हुए वैश्विक समुदाय ने मदद का हाथ बढ़ाया है:
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भारत व चीन: विशेष रेस्क्यू टीमों, भारी मशीनों और ड्रोन के साथ तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं।
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अंतरराष्ट्रीय सहायता: संयुक्त राष्ट्र (UN) ने 2.5 मिलियन डॉलर, अमेरिका और कनाडा ने 3.6-3.6 मिलियन डॉलर, ब्रिटेन ने 6.8 मिलियन डॉलर और यूरोपीय संघ (EU) ने 2.3 मिलियन डॉलर की आपातकालीन राहत राशि की घोषणा की है।
जलवायु परिवर्तन के कारण अचानक आई इस भयानक त्रासदी ने पूरे हिमालयी क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। पीड़ित परिवारों को भोजन, सुरक्षित आश्रय और चिकित्सा सहायता पहुंचाना इस समय प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।