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डोनाल्ड ट्रंप का दावा : एक ही हमले में ईरान के 40 नेताओं को मार गिराया गया

तनाव चरम पर, ईरान लगातार कर रहा जवाबी हमले

 

इस्राइल में विपक्ष के नेता यायिर लैपिड ने कहा- खामेनेई की हत्या इस्राइल की सुरक्षा के लिए जरूरी थी

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका-इस्राइल की संयुक्त कार्रवाई में एक ही हमले में ईरान के 48 नेताओं को मार गिराया गया। ट्रंप ने इस ऑपरेशन को बड़ी सफलता बताया। खामेनेई की मौत के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर है और ईरान लगातार जवाबी हमले कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में अमेरिकी सैन्य अभियान तय समय से पहले आगे बढ़ रहा है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। अब यह माना जा रहा है कि ट्रंप के इस दावे से युद्ध और तेज हो सकता है। अमेरिका और इस्राइल पहले ही साफ कर चुके हैं कि सैन्य कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक उनके लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते। वहीं ईरान ने भी स्पष्ट किया है कि वह जवाबी हमले जारी रखेगा। 

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी मिसाइल हमले से अमेरिकी पोत- यूएसएस अब्राहम लिंकन पर कोई असर नहीं हुआ है। अमेरिका का दावा है कि ईरान के मिसाइल हमले से एयरक्राफ्ट कैरियर पर कोई असर नहीं पड़ा है। पोत अपना ऑपरेशन जारी रखे हुए है। ईरान की मिसाइल जहाज़ तक नहीं पहुंची। वहीं इस्राइल में विपक्ष के नेता यायिर लैपिड ने कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की हत्या इस्राइल की सुरक्षा के लिए जरूरी थी। कहाकि हम ईरान में वही करते रहेंगे जो हम कर रहे हैं। ताकि यह पक्का हो सके कि इस्राइली लोग सुरक्षित रहें। उन्होंने कहा कि खामेनेई की मौत 35 साल देर से हुई है।

एक अन्य बयान में यूएस सेंट्रल कमांड ने कहाकि ईरान के खिलाफ मिलिट्री ऑपरेशन की शुरुआत में ओमान में एक ईरानी जहाज पर भी हमला किया गया। उधर, पश्चिम एशिया में तनावपूर्ण हालात को देखते हुए दुनिया की सबसे बड़ी कंटेनर शिपिंग कंपनी मार्सक ने सुरक्षा कारणों से होर्मुज जलडमरूमध्य से मालवाहक जहाजों की आवाजाही रोकने का फैसला लिया है। डेनमार्क की इस कंपनी ने ऑनलाइन एडवाइज़री में कहा, ’हम अगली सूचना तक होर्मुज जलडमरूमध्य में सभी जहाजों के आने-जाने पर रोक लगा रहे हैं। हमारे क्रू, जहाजों और ग्राहकों के माल की सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। बता दें कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का एलान किया है। हालांकि ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने फिलहाल, ऐसे किसी भी फैसले से इनकार किया है।