माली में अलकायदा का भीषण तांडव: 70 से अधिक लोगों की मौत, राजधानी बामको की घेराबंदी का खतरा
गांवों को बनाया निशाना, स्थानीय समझौतों का विरोध
बामको (माली): अफ्रीकी देश माली इस वक्त जिहादी आतंकवाद की भीषण आग में झुलस रहा है। अलकायदा से जुड़े खूंखार संगठन जमात नुसरत अल-इस्लाम वल मुस्लिमीन (JNIM) ने देश के विभिन्न हिस्सों में सिलसिलेवार हमले कर भारी तबाही मचाई है। इन हमलों में अब तक कम से कम 70 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि स्थानीय सूत्रों का कहना है कि यह संख्या 80 के पार जा सकती है।
गांवों को बनाया निशाना, स्थानीय समझौतों का विरोध
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, JNIM उन गांवों को विशेष रूप से निशाना बना रहा है जिन्होंने उनके द्वारा थोपे गए स्थानीय समझौतों पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। बुधवार को हुए हमलों में ही करीब 30 ग्रामीणों की जान चली गई। आतंकियों का यह क्रूर चेहरा तब सामने आया जब उन्होंने निहत्थे लोगों पर अंधाधुंध गोलीबारी की।
सेना की निष्क्रियता पर भड़के लोग
इस त्रासदी ने स्थानीय प्रशासन और सेना के प्रति जनता के आक्रोश को बढ़ा दिया है। एक स्थानीय युवा नेता ने समाचार एजेंसी एएफपी (AFP) से बात करते हुए सेना पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "सेना की टुकड़ियाँ पास में ही मौजूद थीं, हमने बार-बार मदद की गुहार लगाई, लेकिन उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया। हमारे अपनों का खून बहता रहा और वे मूकदर्शक बने रहे।"
जेल पर हमला और खतरनाक कैदियों की रिहाई का डर
आतंकियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने राजधानी बामको से महज 60 किमी दूर केनीरोबा सेंट्रल जेल को निशाना बनाया है। इस जेल में करीब 2,500 कैदी बंद हैं, जिनमें से 72 कैदी 'अत्यधिक खतरनाक' श्रेणी के हैं। इस हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
राजधानी बामको की घेराबंदी और रूसी सैनिकों की वापसी
JNIM ने अब राजधानी बामको की पूर्ण घेराबंदी करने की धमकी दी है। संगठन ने मुख्य रास्तों पर चेकपॉइंट स्थापित करने की घोषणा की है। हालात तब और बिगड़ गए जब इस आतंकी गुट ने तुआरेग-बहुल अजावाद लिबरेशन फ्रंट (FLA) के साथ हाथ मिला लिया।
प्रमुख घटनाक्रम:
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अप्रैल में रक्षा मंत्री की मौत: आतंकी हमलों में माली के रक्षा मंत्री सादियो कैमारा की जान जा चुकी है।
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रूसी सैनिकों का पीछे हटना: रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण किडल शहर से रूसी सैनिकों (वैगनर ग्रुप) को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा है।
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सेना का दावा: सैन्य कमांडर जिब्रिला मैगा ने माना है कि खतरा गंभीर है, हालांकि सेना विद्रोहियों के खिलाफ अभियान चलाने का दावा कर रही है।
माली की वर्तमान स्थिति अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। बढ़ती मौतें और कमजोर पड़ती सुरक्षा व्यवस्था ने देश के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है।