{"vars":{"id": "125128:4947"}}

AI की एक गलती ने ला दिया था अमेरिका और चीन को जंग के मुहाने पर? ईरान संकट के दौरान टला बड़ा महायुद्ध

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा तैयार की गई एक झूठी इंटेलिजेंस रिपोर्ट के कारण अमेरिकी सेना चीनी जहाज पर हमले की तैयारी कर चुकी थी, लेकिन अंतिम समय में सच सामने आने से एक बड़ा भू-राजनीतिक संघर्ष टल गया।

 

हाल ही में सामने आई एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, इस साल फरवरी के आखिर में ईरान संकट के दौरान अमेरिका और चीन के बीच लगभग युद्ध छिड़ने की नौबत आ गई थी। इस पूरे संकट की जड़ कोई इंसान नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की एक तकनीकी गलती (हैलुसिनेशन) थी, जिसने दो महाशक्तियों को आमने-सामने ला खड़ा किया था।

क्या थी पूरी घटना?

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमलों के कुछ ही हफ्तों बाद अमेरिकी सेना को एक खुफिया (इंटेलिजेंस) रिपोर्ट मिली। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पश्चिम एशिया में एक चीनी जहाज गुजर रहा है, जो ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़े संवेदनशील पुर्जे ले जा रहा है।

इस संवेदनशील सूचना के मिलते ही अमेरिकी सेना हरकत में आ गई। हथियारबंद अमेरिकी सैनिक उस चीनी जहाज को रोकने और उस पर चढ़ने (बोर्डिंग ऑपरेशन) की तैयारी करने लगे, जबकि सैन्य विमान हवा में मुस्तैद कर दिए गए थे।

आखिरी वक्त में हुआ बड़ा खुलासा

यह ऑपरेशन शुरू होने से ठीक पहले जब सैन्य अधिकारियों ने इंटेलिजेंस रिपोर्ट की दोबारा और गहराई से जांच की, तो उनके होश उड़ गए। पता चला कि यह रिपोर्ट पूरी तरह से AI चैटबॉट द्वारा तैयार की गई थी।

अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशन्स कमांड के एक एनालिस्ट द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे चैटबॉट ने जहाज के सामान की सूची (मैनिफेस्ट) में दर्ज सामग्रियों की बेहद गलत पहचान कर ली थी। हैरानी की बात यह थी कि बिना सोचे-समझे यह झूठी रिपोर्ट कई आधिकारिक चैनलों से पास हो गई और इसे बेहद विश्वसनीय सैन्य इंटेलिजेंस मान लिया गया था। एक अमेरिकी सूत्र ने स्वीकार किया कि इस गलती ने लगभग युद्ध की स्थिति पैदा कर दी थी, लेकिन समय रहते सच सामने आने से एक विनाशकारी टकराव टल गया।

AI तकनीक के गंभीर जोखिम और भविष्य की चिंताएं

यह घटना सैन्य क्षेत्र में AI के इस्तेमाल से जुड़े भारी जोखिमों को उजागर करती है। पूर्व वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि जहां युद्ध के मैदान में तेजी से फैसले लेने की जरूरत होती है, वहां AI जनरेटेड डेटा पर पूरी तरह निर्भर रहना खतरनाक साबित हो सकता है। यदि अमेरिकी जवान उस चीनी जहाज पर कार्रवाई कर देते, तो वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच सीधी सैन्य झड़प हो सकती थी, जिसके परिणाम पूरी दुनिया के लिए भयानक होते।

इन खतरों के बावजूद, अमेरिकी सेना रक्षा क्षेत्र में AI का दायरा लगातार बढ़ा रही है। टारगेट चुनने, लॉजिस्टिक्स संभालने और इंटेलिजेंस एनालिसिस के लिए इसका उपयोग तेजी से हो रहा है। इसी साल जनवरी में पेंटागन ने अपनी 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक्सेलरेशन स्ट्रैटेजी' भी जारी की है, जो आने वाले समय में युद्ध की रणनीति में AI की भूमिका को और मजबूत करेगी।