चीन की घेराबंदी का करारा जवाब! ड्रैगन का डर छोड़ भारत के साथ फाइटर जेट और पनडुब्बी डील कर रहा दक्षिण कोरिया
सियोल में राजनाथ सिंह की बैठक के बाद हलचल तेज; पनडुब्बी, KF-21 लड़ाकू विमान और लेजर वेपन्स के ज्वाइंट प्रोडक्शन पर बनी सहमति, बीजिंग में बढ़ी बेचैनी
सियोल/नई दिल्ली। एशिया महाद्वीप में भू-राजनीतिक समीकरण बहुत तेजी से बदल रहे हैं। चीन की विस्तारवादी नीति और आर्थिक धौंस को ठेंगा दिखाते हुए अब दक्षिण कोरिया ने भारत के साथ अपने रक्षा संबंधों को एक नई ऊंचाई दी है। भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हालिया सियोल दौरे के बाद यह साफ हो गया है कि दोनों देश मिलकर लड़ाकू विमान, अत्याधुनिक पनडुब्बी, मिसाइल और लेजर हथियारों के संयुक्त उत्पादन (Joint Production) पर बेहद आक्रामक तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। भारत को चारों तरफ से घेरने की कोशिश में जुटे चीन के लिए यह रणनीतिक साझेदारी एक बड़ा झटका मानी जा रही है।
सियोल में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की हाई-लेवल मीटिंग
भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल का दौरा कर वहां के रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक और रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन के मंत्री ली योंग-चुल के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में दोनों देश "संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन और संयुक्त निर्यात" के फॉर्मूले पर सहमत हुए। इससे पहले अप्रैल में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग की नई दिल्ली यात्रा के दौरान 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' का रोडमैप तैयार किया गया था, जिसे अब जमीन पर उतारा जा रहा है। इसके लिए 'कोरिया-भारत रक्षा एक्सीलरेटर' (KIND-X) प्रोग्राम को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
इन 4 बड़े सेक्टर्स में होने जा रही है महाडील
1. अत्याधुनिक पनडुब्बी (Project P-75I): भारतीय नौसेना अपने प्रोजेक्ट P-75I के तहत बेहद शक्तिशाली पनडुब्बियां बनाना चाहती है। इस रेस में दक्षिण कोरिया की 'हनव्हा ओशन' (Hanwha Ocean) कंपनी अपनी एडवांस लिथियम-आयन बैटरी और 'एयर-इंडिपेंडेंट प्रॉपल्शन' (AIP) तकनीक भारत को देने के लिए सबसे आगे है। इस तकनीक से भारतीय पनडुब्बियां बिना आवाज किए लंबे समय तक पानी के नीचे रहकर दुश्मनों पर नजर रख सकेंगी।
2. फाइटर जेट्स और एयर डिफेंस सिस्टम: दोनों देशों के बीच दक्षिण कोरिया के नए 4.5 जनरेशन के 'KF-21 बोरामे' और 'FA-50' हल्के लड़ाकू विमानों को लेकर गंभीर चर्चा चल रही है। इसके अलावा, पर्वतीय क्षेत्रों में दुश्मन के ड्रोन और विमानों को मार गिराने के लिए दक्षिण कोरिया के 'K30 बिहो' (Biho) एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम को भारत में ही निर्मित करने की तैयारी है। वर्तमान में दोनों देश मिलकर 'K9 वज्र' तोप का सफल निर्माण भारत में (L&T और Hanwha Aerospace के सहयोग से) कर ही रहे हैं।
3. लेजर वेपन्स और भविष्य की तकनीक: भविष्य के युद्धों को देखते हुए भारत और दक्षिण कोरिया हाई-एनर्जी लेजर हथियार (Laser Weapons) विकसित करने पर सहमत हुए हैं। यह तकनीक पलक झपकते ही दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों को आसमान में ही खाक कर देगी।
4. शिपयार्ड और क्रेन इंफ्रास्ट्रक्चर: भारत की कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) ने हुंडई हेवी इंडस्ट्रीज के साथ लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक (LPD) के निर्माण के लिए समझौता किया है। वहीं, भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) ने हुंडई KSOE के साथ मिलकर अगली पीढ़ी के समुद्री और बंदरगाह क्रेन सिस्टम के लिए हाथ मिलाया है।
दक्षिण कोरिया ने अचानक क्यों बदली अपनी नीति?
वर्षों तक दक्षिण कोरिया अपने सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार चीन की नाराजगी के डर से भारत के साथ सीधे सैन्य सौदे करने से हिचकता था। लेकिन चीन की आक्रामक नौसैनिक नीतियों और वैश्विक सप्लाइ चेन में बढ़ते दखल ने सियोल को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। कच्चे माल और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए चीन पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से दोनों देशों ने 'इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग' शुरू किया है।
इसके साथ ही, उत्तर कोरिया के मिसाइल खतरों से निपटने के लिए दक्षिण कोरिया को कम दूरी की विनाशक मिसाइलों की आवश्यकता है, जिसमें भारत को महारत हासिल है। माना जा रहा है कि दक्षिण कोरिया भारत से मिसाइल घटकों और प्रणालियों का आयात भी कर सकता है।
ग्लोबल मार्केट पर कब्जा करने की तैयारी
इस रक्षा साझेदारी का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि भारत और दक्षिण कोरिया केवल अपनी सेनाओं के लिए हथियार नहीं बना रहे हैं। दोनों का लक्ष्य दक्षिण कोरिया की हाई-एंड तकनीक और भारत की विशाल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता (Make in India) को मिलाकर तीसरी दुनिया के देशों को हथियार बेचना है। इन हथियारों को दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य-पूर्व, पूर्वी यूरोप, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के उभरते बाजारों में निर्यात किया जाएगा।