निःशुल्क BMD जांच शिविर में 222 लोगों ने कराया परीक्षण, हर 4 में से 3 लोगों में ऑस्टियोपोरोसिस या ऑस्टियोपेनिया के लक्षण
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर एपेक्स हॉस्पिटल में आयोजित हुआ जांच शिविर, विशेषज्ञों ने दी व्यायाम और पौष्टिक आहार की सलाह
वाराणसी। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर Apex Hospital में महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए निःशुल्क बोन मिनरल डेंसिटी (BMD) जांच शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर अस्पताल के चेयरमैन Dr. S. K. Singh के संरक्षण में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।
222 लोगों ने कराई जांच
अस्पताल में आयोजित इस शिविर में 20 वर्ष से लेकर 80 वर्ष तक के लोगों ने निःशुल्क बीएमडी जांच का लाभ उठाया। इसमें अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों, उनके परिजनों के साथ-साथ अस्पताल के स्टाफ ने भी हिस्सा लिया।
जांच के दौरान कुल 222 लोगों की बीएमडी जांच की गई। रिपोर्ट के अनुसार 43 लोगों में ऑस्टियोपोरोसिस और 123 लोगों में ऑस्टियोपेनिया के लक्षण पाए गए, जबकि बाकी लोगों की स्थिति सामान्य पाई गई।
महिलाओं में अधिक पाया जाता है जोखिम
विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन, थायरॉयड की समस्या और रजोनिवृत्ति के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। इसके अलावा कैल्शियम और विटामिन-D की कमी तथा शारीरिक गतिविधि में गिरावट भी हड्डियों को कमजोर बनाती है।
डॉक्टरों का कहना है कि यह समस्या विशेष रूप से 40 से 50 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं में अधिक देखने को मिलती है। इसके कारण पीठ और कमर में दर्द, कूबड़ निकलना, रीढ़ की लंबाई कम होना, चलने-फिरने में दिक्कत और मामूली चोट में भी हड्डी टूटने का खतरा बढ़ जाता है।
जीवनशैली भी बन रही कारण
अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों ने बताया कि अनियमित दिनचर्या, फास्ट फूड का बढ़ता चलन और पौष्टिक आहार की कमी के कारण अब युवा वर्ग में भी हड्डियों की कमजोरी के मामले बढ़ रहे हैं।
शिविर में आए लोगों को डॉक्टरों ने नियमित व्यायाम करने, कैल्शियम और विटामिन-D से भरपूर भोजन लेने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी। वहीं डाइटिशियन द्वारा संतुलित आहार के बारे में भी जानकारी दी गई।
समय पर जांच से हो सकता है बचाव
विशेषज्ञों के मुताबिक Osteoporosis एक ऐसी स्थिति है जिसमें हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर और नाजुक हो जाती हैं। कई बार खांसने, छींकने या हल्के झुकने से भी फ्रैक्चर हो सकता है। आमतौर पर इसके फ्रैक्चर रीढ़, कलाई और कूल्हे में देखने को मिलते हैं।
डॉक्टरों ने बताया कि समय-समय पर जांच, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से इस बीमारी से काफी हद तक बचाव संभव है।