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वाराणसी: स्ट्रोक मरीजों के इलाज के लिए बने प्रभावी रेफरल नेटवर्क, बीएचयू के न्यूरोलॉजिस्ट ने स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजे सुझाव

स्ट्रोक के शुरुआती 4.5 घंटे के भीतर मिल सकता है सही उपचार, ग्रामीण और दूरदराज के मरीजों के लिए वरदान साबित होगी तकनीक

 

वाराणसी, भदैनी मिरर। पक्षाघात यानी स्ट्रोक के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की बड़ी मांग उठने लगी है। इसे लेकर काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस बीएचयू) के न्यूरोलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विजयनाथ मिश्रा ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भेजा है। उनके इस सुझाव का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के मरीजों को समय पर आधुनिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।

रोजाना आ रहे दर्जनों मामले

प्रो. वीएन मिश्रा ने अपने सुझाव में बताया कि स्ट्रोक के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। अकेले बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग में रोजाना 20 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। स्ट्रोक के मामलों में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है और घटना के शुरुआती साढ़े चार घंटे यानी 'गोल्डन ऑवर' (Golden Hour) के भीतर मरीज को अस्पताल पहुंचाना अनिवार्य होता है। इस दौरान थक्का घोलने वाली दवा देकर मरीज की जान और गंभीर विकलांगता से बचाया जा सकता है।

सीटी स्कैन और एम्बुलेंस सेवाओं का बने नेटवर्क

प्रो. मिश्र का सुझाव है कि उत्तर प्रदेश में पहले से मौजूद स्वास्थ्य सेवाओं को एक मजबूत रेफरल नेटवर्क के रूप में जोड़ा जाना चाहिए। इस व्यवस्था के तहत 108 एम्बुलेंस सेवा को तुरंत आपातकालीन स्थिति में सक्रिय किया जाए। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को जोड़ा जाए। सीटी स्कैन की सुविधा वाले जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को एक साझा डिजिटल व फिजिकल प्लेटफॉर्म पर लाया जाए।

टेली-स्ट्रोक परामर्श से दूर होगी विशेषज्ञों की कमी

ग्रामीण और छोटे कस्बों के अस्पतालों में न्यूरोलॉजी विशेषज्ञों की भारी कमी देखने को मिलती है। इस समस्या से निपटने के लिए प्रो. मिश्रा ने टेली-स्ट्रोक परामर्श (Tele-Stroke Consultation) को प्रभावी बनाने पर जोर दिया है।

इसके तहत छोटे स्वास्थ्य केंद्रों से डॉक्टर मरीज की स्थिति, मेडिकल रिपोर्ट्स और सीटी स्कैन की डिजिटल तस्वीरें सीधे बड़े मेडिकल संस्थानों के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट्स को भेज सकेंगे। इससे समय रहते विशेषज्ञ की सलाह मिल सकेगी और मरीज को सही समय पर सही दिशा में रेफर किया जा सकेगा।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को धरातल पर उतारा जाता है, तो पूर्वांचल सहित पूरे उत्तर प्रदेश में स्ट्रोक मरीजों की मृत्यु दर और विकलांगता के मामलों में भारी कमी लाई जा सकती है।