Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर खिचड़ी क्यों बनाई जाती है? जानिए परंपरा, सेहत और साइंस का गहरा रहस्य
मकर संक्रांति पर खिचड़ी सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा, आयुर्वेदिक लाभ और नई फसल के उत्सव का प्रतीक है
लाइफ स्टाइल डेस्क। Makar Sankranti 2026 सिर्फ एक पर्व नहीं बल्कि सकारात्मक ऊर्जा, नई शुरुआत और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का उत्सव है। इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे शुभ परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इस पर्व की सबसे खास पहचान है -खिचड़ी।
हर साल मकर संक्रांति पर घर-घर में खिचड़ी बनाई जाती है और दान भी किया जाता है। सवाल यह है कि आखिर मकर संक्रांति पर खिचड़ी ही क्यों बनाई जाती है? इसका उत्तर केवल परंपरा में नहीं, बल्कि आस्था, स्वास्थ्य, आयुर्वेद और साइंस से गहराई से जुड़ा है।
आध्यात्मिक ऊर्जा और सात्विक भोजन का महत्व
मकर संक्रांति को पुण्यकाल माना जाता है। इस दिन दान-पुण्य, पूजा-पाठ और सात्विक भोजन का विशेष महत्व है। खिचड़ी को शुद्ध, सात्विक और हल्का भोजन माना जाता है, जो मन और शरीर को शांत करता है तथा सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है।
सर्दियों के लिए परफेक्ट डाइट
ठंड के मौसम में पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। ऐसे समय में खिचड़ी एक आदर्श आहार मानी जाती है।
- दाल और चावल से बनी खिचड़ी आसानी से पचती है
- घी शरीर को अंदर से गर्म रखता है
- आयुर्वेद के अनुसार खिचड़ी इम्युनिटी बढ़ाने और डिटॉक्स करने में सहायक होती है
इसी कारण मकर संक्रांति जैसे शीत ऋतु के पर्व पर इसका सेवन अत्यंत लाभकारी माना गया है।
नई फसल के स्वागत का प्रतीक
मकर संक्रांति के समय खेतों में नई फसल आती है। ताजे चावल और दाल से बनी खिचड़ी बनाकर लोग प्रकृति और अन्नदाता किसानों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। यह पर्व कृषि संस्कृति और प्रकृति से जुड़ाव का भी संदेश देता है।
साइंस भी करता है खिचड़ी का समर्थन
विज्ञान के अनुसार सर्दियों में शरीर को अधिक कैलोरी और ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
- चावल से तुरंत ऊर्जा
- दाल से प्रोटीन और ताकत
- घी से गर्माहट और पोषण
ये सभी तत्व मिलकर खिचड़ी को विंटर सुपरफूड बनाते हैं।
सामाजिक एकता और आपसी प्रेम का पर्व
उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व के रूप में मनाया जाता है। लोग एक-दूसरे के घर खिचड़ी भेजते हैं, जिससे रिश्तों में मिठास और अपनापन बढ़ता है।