Children Dog Bite: बच्चों में डॉग बाइट को न लें हल्के में, रेबीज से बचाव ही है एकमात्र इलाज; जानिए मशहूर बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय चौरसिया की सलाह
डर के कारण बच्चे छिपा लेते हैं कुत्ता काटने की बात! समय पर 5 टीकों का शेड्यूल और इम्यूनोग्लोबुलिन (RIG) बचा सकता है मासूमों की जान
वाराणसी (भदैनी मिरर): बच्चों में डॉग बाइट (कुत्ता काटना) या अन्य जानवरों के काटने की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। कई बार मासूम बच्चे डर या इंजेक्शन के भय से अपने माता-पिता से यह बात छिपा लेते हैं, जो आगे चलकर बेहद घातक और जानलेवा साबित हो सकता है। इसी गंभीर विषय पर जन जागरूकता फैलाते हुए PMC हॉस्पिटल (रविन्द्रपुरी, वाराणसी) के डायरेक्टर एवं वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय चौरसिया ने अभिभावकों को विशेष सावधानी बरतने और सही समय पर इलाज कराने की सलाह दी है।
रेबीज 100% जानलेवा बीमारी, केवल बचाव ही है उपाय
डॉ. संजय चौरसिया ने बताया कि डॉग बाइट या बिल्ली, सियार व चमगादड़ (Bat) जैसे जानवरों के काटने या खरोंचने से 'रेबीज' नामक जानलेवा संक्रमण होता है। रेबीज का वायरस जब शरीर में फैलकर 'एंसेफलाइटिस' (मस्तिष्क का संक्रमण) का रूप ले लेता है, तो इसमें 100% जान जाने का खतरा रहता है और दुनिया में इसका कोई इलाज उपलब्ध नहीं है। ऐसे में समय पर एंटी-रेबीज टीकाकरण (Vaccination) ही इस घातक बीमारी से एकमात्र बचाव है।
बच्चों के साथ बढ़ाएं संवाद, दूर करें डर
डॉक्टर ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों के साथ ऐसा दोस्ताना माहौल और कॉन्फिडेंस बनाएं कि अगर बाहर खेलने के दौरान उन्हें किसी कुत्ते या जानवर ने काटा या खरोंचा है, तो वे बिना किसी डर के तुरंत घर में बताएं। देरी करने से वायरस शरीर में फैल सकता है।
जानिए एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) का सही शेड्यूल
यदि किसी बच्चे को जानवर काट ले, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क कर वैक्सीन का 5-डोज़ शेड्यूल पूरा करना बेहद अनिवार्य है:
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0-डे डोज़: जिस दिन काटा हो या जितनी जल्दी संभव हो सके (पहला टीका)।
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3rd डे: तीसरे दिन।
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7th डे: सातवें दिन।
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14th डे: चौदहवें दिन।
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28th डे: अठ्ठाइसवें दिन।
गंभीर मामलों में 'इम्यूनोग्लोबुलिन' (RIG) बेहद जरूरी
डॉ. संजय चौरसिया ने स्पष्ट किया कि यदि घाव गहरा या सीवियर (Class III Bite) है, चेहरे या गर्दन पर काटा गया है, अथवा किसी जंगली जानवर (जैसे सियार या चमगादड़) ने हमला किया है, तो केवल वैक्सीन काफी नहीं होती।
ऐसे मामलों में एंटी-रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन (RIG) की भी जरूरत पड़ती है। इसे किसी विशेषज्ञ बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) की देखरेख में घाव के आसपास और बच्चे की मांसपेशियों में लगाया जाता है। समय पर यह इंजेक्शन मिलने से रेबीज वायरस तुरंत बेअसर हो जाता है और बच्चे की जान पूरी तरह बचाई जा सकती है।
विशेषज्ञ की अपील:
रेबीज से सुरक्षा ही सबसे बड़ा बचाव है। अपने बच्चों को जागरूक करें और किसी भी घटना पर बिना लापरवाही के तुरंत पूरा वैक्सीनेशन शेड्यूल फॉलो करें।