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19 राज्यों में कैंसर घोषित होगी 'अधिसूचित बीमारी', सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश; जानें मरीजों को क्या मिलेगा फायदा

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी मांगी रिपोर्ट

 

कैंसर के खिलाफ देशव्यापी लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे कैंसर को तत्काल 'अधिसूचित बीमारी' (Notified Disease) घोषित करें।

अदालत को सूचित किया गया था कि संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों का पालन करते हुए अब तक 17 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश कैंसर को अधिसूचित बीमारी घोषित कर चुके हैं। अब शेष राज्यों को भी इसे लागू कर अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया गया है।

क्या होती है 'अधिसूचित बीमारी' (Notified Disease)?

जब किसी बीमारी को सरकार द्वारा 'अधिसूचित बीमारी' के रूप में दर्ज किया जाता है, तो देश के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों, डॉक्टरों और पैथोलॉजी लैबों के लिए यह अनिवार्य हो जाता है कि वे उस बीमारी के नए मरीज का डेटा संबंधित स्वास्थ्य विभाग और सरकारी अधिकारियों को रिपोर्ट करें।

मरीजों को इस आदेश से क्या-क्या फायदे होंगे?

  1. सटीक डेटा और अर्ली डिटेक्शन: कैंसर मरीजों की सही संख्या का राष्ट्रीय स्तर पर रियल-टाइम डेटा तैयार हो सकेगा, जिससे बीमारी का शुरुआती चरण में ही पता लगाकर समय पर इलाज शुरू किया जा सकेगा।

  2. संसाधनों का सही वितरण: किस राज्य या जिले में किस तरह के कैंसर के मरीज ज्यादा हैं, यह स्पष्ट होने से सरकार वहां कैंसर हॉस्पिटल, कीमोथेरेपी यूनिट और विकिरण उपकरण (Radiotherapy) प्राथमिकता से उपलब्ध करा सकेगी।

  3. सस्ती दवाएं और योजनाएं: सटीक आंकड़ों के आधार पर सरकार कैंसर के इलाज को आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के तहत अधिक प्रभावी बना सकती है और दवाओं के दाम नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

एम्स के पूर्व डॉक्टर की जनहित याचिका पर फैसला

यह महत्वपूर्ण आदेश एम्स (AIIMS) के पूर्व चिकित्सक डॉ. अनुराग श्रीवास्तव की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए आया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और राज्यों की उस विफलता को उजागर किया था, जिसके कारण अब तक भारत में कैंसर केसों की एक समान और अनिवार्य रिपोर्टिंग प्रणाली लागू नहीं हो सकी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी मांगी रिपोर्ट

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्र सरकार से पूछा कि वह सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अनिवार्य दिशा-निर्देश क्यों नहीं जारी कर रही है।

अदालत ने कहा कि कैंसर के फैलाव को रोकने और मरीजों को सही व सस्ता इलाज उपलब्ध कराने के लिए पूरे देश में एक समान नीति (Uniform Policy) बनाई जानी चाहिए।

केंद्र सरकार की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) अनिल कौशिक ने कहा कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है, जिस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि जिन 19 राज्यों ने अब तक सिफारिशों को लागू नहीं किया है, वे तुरंत प्रक्रिया पूरी करें ताकि देश भर में कैंसर नियंत्रण की मजबूत व्यवस्था बन सके।