Sun TV vs Actress Sukanya: मद्रास हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, वीरप्पन इंटरव्यू विवाद में अभिनेत्री सुकन्या को हर्जाना देने का आदेश बरकरार
कोर्ट ने माना सन टीवी की नीयत में खोट; तीसरी पार्टी की मैगजीन में माफीनामा छापने पर उठाए सवाल, कहा- अपने ही चैनल पर क्यों नहीं जताया खेद?
कानूनी डेस्क, भदैनी मिरर: मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) ने तमिल फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी अभिनेत्री सुकन्या (Actress Sukanya) के मानहानि मामले में एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साल 2015 के ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें दिग्गज मीडिया नेटवर्क 'सन टीवी' (Sun TV) को अभिनेत्री सुकन्या को करीब 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।
यह पूरा मामला साल 1996 में कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन (Veerappan) के एक इंटरव्यू के प्रसारण से जुड़ा हुआ है, जिसमें अभिनेत्री के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और मानहानिकारक टिप्पणियां की गई थीं।
क्या है पूरा मामला? (Background of the Case)
यह विवाद अप्रैल 1996 का है, जब खोजी पत्रकार गोपाल (नक्कीरन गोपाल) ने कुख्यात अपराधी वीरप्पन का एक इंटरव्यू लिया था। इस इंटरव्यू को सन टीवी पर प्रसारित किया गया था। इंटरव्यू के दौरान वीरप्पन ने अभिनेत्री सुकन्या के चरित्र पर कीचड़ उछालते हुए उन्हें एक राजनीतिक दल के सदस्य के रिश्तेदार से जोड़ने वाली बेहद आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं।
इस इंटरव्यू से आहत होकर अभिनेत्री सुकन्या ने अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा, परिवार और दोस्तों के बीच छवि को पहुंचे नुकसान के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। उन्होंने सन टीवी, पत्रकार गोपाल और वीरप्पन से 10,00,500 रुपये के मुआवजे और इस इंटरव्यू के दोबारा प्रसारण पर रोक लगाने की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने क्यों माना सन टीवी को दोषी?
जस्टिस के. कुमारेश बाबू की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए सन टीवी की अपीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में सन टीवी की 'दुर्भावना' (Malice) को रेखांकित करने के लिए मुख्य रूप से दो बातें कहीं:
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चैनल के बजाय तीसरी मैगजीन में माफीनामा क्यों? सन टीवी ने दलील दी थी कि विवाद बढ़ने पर उन्होंने माफीनामा जारी किया था। इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि सन टीवी ने अपने ही चैनल पर खेद जताने के बजाय किसी तीसरी पार्टी की मैगजीन में माफीनामा छपवाया।
कोर्ट की टिप्पणी: "अगर यह माफीनामा खुद के चैनल पर प्रसारित किया गया होता, तो यह उन्हीं दर्शकों तक पहुंचता जिन्होंने वह अपमानजनक इंटरव्यू देखा था। किसी थर्ड-पार्टी मैगजीन को चुनना ही यह दिखाता है कि अपीलकर्ता (सन टीवी) की नीयत साफ नहीं थी।"
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इंटरव्यू को एडिट करने का अधिकार था, फिर क्यों नहीं किया? कोर्ट ने ब्रॉडकास्ट एग्रीमेंट का हवाला देते हुए कहा कि सन टीवी के पास इंटरव्यू के किसी भी हिस्से को एडिट करने, काटने या हटाने का पूरा अधिकार था। इसके बावजूद चैनल ने अभिनेत्री से न तो कोई स्पष्टीकरण लिया और न ही दावों की पुष्टि की, बल्कि व्यावसायिक विज्ञापनों से मुनाफा कमाने के लिए इसे वैसे ही प्रसारित कर दिया।
सन टीवी और पत्रकार की दलीलें हुईं खारिज
सन टीवी ने कोर्ट में दलील दी थी कि उन्होंने कार्यक्रम की शुरुआत में एक डिस्क्लेमर (Disclaimer) चलाया था कि विचारों से उनका कोई लेना-देना नहीं है। वहीं पत्रकार गोपाल का कहना था कि उनका मकसद सिर्फ वीरप्पन की अवैध गतिविधियों को सामने लाना था, किसी को बदनाम करना नहीं।
हालांकि, अदालत ने इन सभी दलीलों को खारिज कर दिया और माना कि निचली अदालत ने सन टीवी को मुआवजे के लिए पूरी तरह सही जिम्मेदार ठहराया था। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब सन टीवी को अभिनेत्री सुकन्या को तय मुआवजा राशि का भुगतान करना होगा।