Jailer 2 Movie Review: रजनीकांत के स्वैग और नेलसन की डार्क कॉमेडी का धांसू कॉम्बिनेशन
Jailer 2 Review: रजनीकांत के स्वैग और नेलसन की कॉमेडी ने फिर रचा इतिहास; ब्लॉकबस्टर निकला 'टाइगर मुथुवेल पांडियन' का सीक्वल
भदैनी मिरर डिजिटल डेस्क:साल 2023 में ब्लॉकबस्टर सफलता हासिल करने वाली फिल्म 'जेलर' के बाद, निर्देशक नेलसन दिलिपकुमार और सुपरस्टार रजनीकांत की जोड़ी 'जेलर 2' (Jailer 2) के साथ एक बार फिर सिनेमाघरों में लौट आई है। 75 वर्षीय रजनीकांत के वही चिर-परिचित अंदाज, चश्मे को घुमाने की शैली और स्क्रीन प्रेजेंस ने दर्शकों को फिर से झूमने पर मजबूर कर दिया है। 'जेलर 2' केवल एक सीक्वल नहीं है, बल्कि यह नेलसन के खास डार्क ह्यूमर और मास-मसाला सिनेमा का एक बेहतरीन मिश्रण साबित हो रही है।
कहानी: वही पुराना 'टाइगर' लेकिन नए और बड़े मंसूबों के साथ
फिल्म की शुरुआत पहली फिल्म की यादों को ताजा करती हुई होती है। पहली फिल्म के विलेन वर्मन (विनायकन) की मौत के बाद, उसका दोस्त धीलीप (सूरज वेंजरामूडू) अपने आका बोधि कल्पक (एस.जे. सूर्या) के दबाव में वर्मन के हत्यारे की तलाश में जुटा है।
दूसरी ओर, टाइगर मुथुवेल पांडियन (रजनीकांत) अपनी पत्नी (रम्या कृष्णन), बहु (मिरना मेनन) और पोते के साथ शांत पहाड़ियों के बीच एक सादा जीवन जी रहे हैं। लेकिन कहानी में मोड़ तब आता है जब पता चलता है कि दुश्मन रजनीकांत को नहीं ढूंढ रहे, बल्कि 'टाइगर' खुद मूर्ति तस्करी गिरोह को अपने जाल में फंसाने के लिए जाल बिछाकर बैठा था।
कॉमेडी और एक्शन का बेजोड़ तालमेल
फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका डायलॉग-ह्यूमर और एक्शन टाइमिंग है:
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दारुण ह्यूमर: पहली फिल्म में योगी बाबू के किरदार की तरह इस बार नामो नारायण (मूर्ती) और उनके साथियों के दृश्य दर्शकों को हंसा-हंसाकर लोटपोट कर देते हैं।
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मास मोमेंट्स: एक टी-स्टॉल पर सेट 'सेवियर रजनी' सीन और ब्रिज पर रजनीकांत का केवल अपने चश्मे को हिलाना ही सिनेमाघरों में सीटियां और तालियां बजाने के लिए काफी है।
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कैमियो और सरप्राइज: शिव राजकुमार के किरदार को इस बार और अधिक महत्वपूर्ण बनाया गया है। हालांकि, मोहनलाल और जैकी श्रॉफ का स्क्रीन टाइम थोड़ा कम है, लेकिन दूसरे हाफ में एक विशेष सुपरस्टार का कैमियो दर्शकों के लिए किसी सरप्राइज गिफ्ट से कम नहीं है।
इमोशनल कनेक्ट और कसावट
'जेलर 2' पहली फिल्म के उस भावनात्मक पहलू से जुड़ती है जहाँ मुथुवेल पांडियन को अपने ही बेटे को खोना पड़ा था। फिल्म का दूसरा हाफ परिवार को सुरक्षा देने और उस पुराने दर्द से उबरने के भावनात्मक सफर को बखूबी दिखाता है। निर्देशक नेलसन ने छोटी-छोटी डिटेल्स पर काम किया है जो फिल्म को एक मजबूत और विचारशील सीक्वल बनाती हैं।
कमियां (Minor Flaws)
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म्यूजिक और गाने: अनिरुद्ध रविचंदर का बैकग्राउंड म्यूजिक हमेशा की तरह बेहतरीन है, लेकिन फिल्म के दो आइटम गाने ('अला बोलेलो' आदि) कहानी की रफ्तार को थोड़ा धीमा करते हैं।
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सेकंड हाफ का कुछ हिस्सा: गोवा के बर्थडे पार्टी वाला सीन पेपर पर जितना अच्छा लगता है, पर्दे पर उतना असर नहीं छोड़ पाता।
फैसला (Verdict)
उम्र के इस पड़ाव पर भी रजनीकांत का स्क्रीन पर जो जलवा और स्टाइल है, वह बेहद प्रेरणादायक है। बिना भारी-भरकम डांस या जटिल एक्शन स्टंट के भी वह केवल अपनी मौजूदगी से हर फ्रेम पर राज करते हैं। अगर आप रजनीकांत के फैन हैं और एक बेहतरीन मास-मनोरंजक फिल्म की तलाश में हैं, तो 'जेलर 2' को थिएटर्स में मिस बिल्कुल न करें!