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'भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना': गाना बनाने वाले गीतकार शैलेंद्र की दर्दनाक कहानी, इस सदमे ने ली थी जान

लता मंगेशकर की आवाज में अमर हुए इस रक्षाबंधन एंथम के पीछे की भावुक कहानी; फ्लॉप फिल्म के सदमे से नहीं उबर पाए थे गीतकार शैलेंद्र

 

रक्षाबंधन का त्योहार आते ही फिज़ाओं में एक गाना सबसे ज्यादा गूंजता है—"भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना..."। 50 के दशक की धुनों पर बना यह गाना आज भी भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की सबसे खूबसूरत मिसाल है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल को सुकून देने वाले इस कालजयी गीत को किसने लिखा था और उस महान गीतकार का अंत कितना दुखद रहा?

1959 में आई फिल्म 'छोटी बहन' का एंथम

वर्ष 1959 में रिलीज हुई फिल्म छोटी बहन में यह गाना फिल्माया गया था। फिल्म की कहानी दो भाइयों (बलराज साहनी और रहमान) और उनकी छोटी बहन (नंदा) के इर्द-गिर्द घूमती है।

  • आवाज और संगीत: लता मंगेशकर की सुरीली आवाज में गाए गए इस गाने ने उस दौर में तहलका मचा दिया था। इस गीत के लिए लता मंगेशकर को फिल्मफेयर अवॉर्ड से भी नवाजा गया था।

  • गीतकार शैलेंद्र का जादू: इस बेहद सरल लेकिन दिल को छू लेने वाले बोल महान गीतकार शैलेंद्र ने लिखे थे।

फिल्म निर्माण का सदमा और गीतकार का निधन

राज कपूर के बेहद करीबी दोस्त और 'आवारा हूं', 'मेरा जूता है जापानी' जैसे अमर गीत देने वाले शैलेंद्र ने अपने जीवन में केवल एक फिल्म प्रोड्यूस की थी—तीसरी कसम (जिसमें राज कपूर और वहीदा रहमान मुख्य भूमिका में थे)। दुर्भाग्य से यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई। इस असफलता और भारी वित्तीय नुकसान का सदमा शैलेंद्र बर्दाश्त नहीं कर सके और इसी गहरे सदमे की वजह से उनका असमय निधन हो गया। हालांकि, उनके जाने के बाद इसी फिल्म तीसरी कसम को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Film Award) से सम्मानित किया गया।

एक और रक्षाबंधन एंथम: 'हम बहनों के लिए'

रक्षाबंधन के गीतों में सिर्फ 'भैया मेरे...' ही नहीं, बल्कि 1969 में आई फिल्म अंजाना का गाना "हम बहनों के लिए..." भी करीब 57 सालों से दर्शकों का पसंदीदा बना हुआ है।

  • कलाकार: यह गाना अभिनेता राजेंद्र कुमार और नाजिमा पर फिल्माया गया था।

  • संगीतकार और गीतकार: इस मशहूर गीत को आनंद बक्शी ने लिखा था और इसकी धुन लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी ने तैयार की थी। लता मंगेशकर की आवाज में रिकॉर्ड यह गाना भी हर साल रक्षाबंधन पर खूब सुना जाता है।a