विश्व पर्यटन दिवस: आचार्य सीताराम चतुर्वेदी महिला महाविद्यालय की छात्राओं ने सारनाथ का किया शैक्षणिक भ्रमण
धमेख स्तूप व संग्रहालय देख समृद्ध भारतीय विरासत से रूबरू हुईं छात्राएं; निदेशक प्रो. कल्पलता पाण्डेय ने कहा— 'पर्यटन विश्व शांति और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम'।
वाराणसी/सारनाथ (भदैनी मिरर): विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर रविवार (27 सितंबर) को डोमरी (रामनगर) स्थित आचार्य सीताराम चतुर्वेदी महिला महाविद्यालय की छात्राओं और शिक्षक-शिक्षिकाओं की टीम ने भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ का एक दिवसीय शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार ने "पर्यटन से संस्कृति, समृद्धि और शांति" की वैश्विक थीम को साकार करते हुए सारनाथ भ्रमण पर आए विदेशी पर्यटकों का भारतीय परंपरा के अनुसार माला पहनाकर और माथे पर तिलक लगाकर अभिनंदन किया। काशी की इस 'अतिथि देवो भव:' परंपरा और आत्मीय स्वागत से अभिभूत होकर विदेशी सैलानियों ने भारतीय संस्कृति की जमकर सराहना की।
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इतिहास, संस्कृति और बौद्ध दर्शन से रूबरू हुईं छात्राएं
शैक्षणिक भ्रमण के दौरान छात्राओं ने सारनाथ स्थित पुरातात्विक परिसर, धमेख स्तूप, ऐतिहासिक अशोक स्तंभ, सारनाथ संग्रहालय तथा विभिन्न बौद्ध मंदिरों का अवलोकन किया।
शिक्षकों ने छात्राओं को सारनाथ के ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी, जिससे छात्राओं को भारतीय संस्कृति की प्राचीनता और बौद्ध दर्शन के वैश्विक प्रभाव को करीब से समझने का अवसर मिला।
"पर्यटन केवल भ्रमण नहीं, संस्कृति और विश्व शांति का माध्यम": प्रो. कल्पलता पाण्डेय
महाविद्यालय की निदेशक प्रो. कल्पलता पाण्डेय ने इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा:
"इस प्रकार के शैक्षणिक और सांस्कृतिक आयोजनों से छात्राओं में व्यावहारिक ज्ञान, वैश्विक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक समझ विकसित होती है। पर्यटन केवल मनोरंजन या भ्रमण का साधन नहीं है, बल्कि यह रोजगार सृजन, विचारों व संस्कृति के आदान-प्रदान और विश्व शांति की स्थापना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण माध्यम है।"
इस शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण कार्यक्रम में महाविद्यालय की समस्त छात्राएं, शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा गैर-शिक्षण कर्मचारी उपस्थित रहे।