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काशी विद्यापीठ में NSUI का जबरदस्त आक्रोश: नीट पेपर लीक और छात्र की खुदकुशी के खिलाफ निकाला मशाल जुलूस, शिक्षा मंत्री को बर्खास्त करने की मांग

कैंपस से भारत माता मंदिर तक जाना था कैंडल मार्च, पुलिस ने गेट पर रोका तो तीखी नोकझोंक; ऋषभ पांडेय बोले- 'क्या पेपर लीक परमिशन लेकर होता है?'

 

वाराणसी: नीट (NEET) परीक्षा में हुई कथित धांधली और पेपर लीक मामले को लेकर देश भर के छात्रों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार की शाम वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ (MGKVP) परिसर में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। एनएसयूआई के पूर्वी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष ऋषभ पांडेय के नेतृत्व में सैकड़ों छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में मशाल जुलूस और कैंडल मार्च निकाला।

यह प्रदर्शन उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में नीट परीक्षार्थी ऋतिक मिश्रा द्वारा कथित तौर पर आत्महत्या किए जाने के विरोध में और उसे भावपूर्ण श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित किया गया था। छात्र इस दौरान नीट परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने, पूरे मामले की जांच सीबीआई (CBI) से कराने और देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत बर्खास्त करने की मांग कर रहे थे।

कैंपस के गेट पर रोके जाने से भड़के छात्र, पुलिस से तीखी झड़प

तय कार्यक्रम के अनुसार, सोमवार शाम 6 बजे छात्रों का यह मशाल जुलूस और कैंडल मार्च विश्वविद्यालय परिसर से शुरू होकर ऐतिहासिक भारत माता मंदिर तक जाना था। लेकिन जैसे ही छात्र मशाल और मोमबत्तियां लेकर आगे बढ़े, भारी पुलिस बल ने उन्हें विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर ही रोक दिया। प्रशासन द्वारा रोके जाने से छात्र बेहद आक्रोशित हो गए और पुलिसकर्मियों व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उनकी तीखी नोकझोंक हुई।

प्रशासन द्वारा 'परमिशन (अनुमति) न होने' की बात कहे जाने पर एनएसयूआई के पूर्वी यूपी अध्यक्ष ऋषभ पांडेय ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा, "जब देश में शिक्षा माफिया लगातार परीक्षाएं लीक कर रहे हैं और छात्रों का भविष्य बर्बाद हो रहा है, तो क्या वो सरकार से परमिशन लेकर पेपर लीक करते हैं? जब एक होनहार छात्र आत्महत्या करने को मजबूर होता है, तब नियम कहाँ चले जाते हैं? हमें शांतिपूर्ण तरीके से शोक और विरोध प्रकट करने से भी रोका जा रहा है, जो बेहद निंदनीय है।"

हम गांधीवादी तरीके से लड़ रहे हैं

ऋषभ पांडेय ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा, "लखीमपुर खीरी के अंदर एबीवीपी के लोगों ने देश के हित में चौबीसों घंटे ड्यूटी करने वाले हमारे सम्मानित पुलिसकर्मियों को 'वर्दी वाला गुंडा' कहा और गंदी-गंदी गालियां दीं। उनके लिए कोई नियम नहीं हैं, वे मुख्य सड़कों पर आंदोलन करते हैं। लेकिन हम एनएसयूआई के लोग हैं, जो गांधी और भगत सिंह की विचारधारा पर चलते हैं। हम शांतिपूर्ण तरीके से न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं।"

पीएम मोदी और शिक्षा मंत्री पर साधा निशाना, की बड़ी मांगें

छात्र नेताओं ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि वाराणसी के अंदर अब सरकार के खिलाफ बोलना या शांतिपूर्ण विरोध करना भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। जब से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पद संभाला है, तब से लगातार परीक्षाएं लीक हो रही हैं और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।

NSUI की प्रमुख मांगें:

  • लखीमपुर के पीड़ित छात्र ऋतिक मिश्रा को न्याय मिले और दोषियों पर कार्रवाई हो।

  • धांधली की शिकार हुई नीट परीक्षा को तुरंत रद्द कर इसका आयोजन नए सिरे से कराया जाए।

  • इस पूरे पेपर लीक नेक्सस की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी जाए।

  • लगातार हो रही विफलताओं की जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें और NTA को पूरी तरह से बैन किया जाए।

छात्रों ने स्पष्ट किया कि जब तक देश के नौजवानों और ईमानदार छात्रों को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक एनएसयूआई राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में पूरे देश के भीतर इस आंदोलन को और बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाएगी।