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MBBS छात्रों के लिए बड़ी राहत, नेशनल मेडिकल कमीशन ने पहले प्रोफेशनल एग्जाम के लिए दी 'मर्सी अटेम्प्ट' की अनुमति

शैक्षणिक वर्ष 2019-20 और उसके बाद के प्रवेश पाने वाले छात्रों को मिलेगा एक अतिरिक्त मौका

 

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली (भदैनी मिरर): देश के मेडिकल छात्रों के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने एक बेहद राहत भरा फैसला लिया है। एनएमसी ने शैक्षणिक वर्ष (Academic Year) 2019-20 और उसके बाद के प्रवेश पाने वाले योग्य एमबीबीएस (MBBS) छात्रों के लिए 'प्रथम प्रोफेशनल एमबीबीएस परीक्षा' (First Professional MBBS Examination) पास करने हेतु एक अतिरिक्त अवसर यानी 'मर्सी अटेम्प्ट' (Mercy Attempt) की मंजूरी दे दी है। यह फैसला लंबित मामलों के लिए एक बार दी जाने वाली विशेष छूट (One-time transitional relaxation) के रूप में लिया गया है।

क्यों लिया गया यह फैसला?

एनएमसी द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, छात्रों, विश्वविद्यालयों और अन्य स्टेकहोल्डर्स की तरफ से लगातार मिल रहे उन अभ्यावेदनों पर विचार किया गया, जिनमें कोविड-19 महामारी के दौर की बाधाओं, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और अन्य व्यक्तिगत कठिनाइयों का हवाला देते हुए एक अतिरिक्त प्रयास की मांग की गई थी। 23 सितंबर 2026 को आयोजित एनएमसी की 18वीं बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई।

क्या हैं मुख्य शर्तें और नियम?

  1. कुल 5 प्रयास की अनुमति: शैक्षणिक वर्ष 2019-20 या उसके बाद प्रवेश लेने वाले छात्र, जो पहले से निर्धारित 4 प्रयासों में परीक्षा पास नहीं कर सके हैं, उन्हें 1 अतिरिक्त प्रयास (कुल 5 प्रयास) की अनुमति दी जाएगी।

  2. चार साल की अवधि की बाध्यता नहीं: यह अतिरिक्त प्रयास तब भी उपलब्ध होगा जब छात्र ने प्रथम वर्ष को पूरा करने के लिए निर्धारित 4 साल की अवधि को पार कर लिया हो, बशर्ते छात्र का प्रवेश संबंधित विश्वविद्यालय या कॉलेज द्वारा रद्द न किया गया हो और वैध बना रहे।

  3. किन्हें नहीं मिलेगा लाभ? जिन छात्रों ने एनएमसी के किसी पुराने फैसले या अदालत के निर्देश के तहत पहले ही एक मर्सी अटेम्प्ट का लाभ ले लिया है और कुल 5 प्रयास पूरे कर चुके हैं, वे इस नए नियम के तहत छठे प्रयास के पात्र नहीं होंगे।

  4. 10 साल की कुल सीमा बरकरार: एमबीबीएस कोर्स को पूरा करने की अधिकतम समग्र अवधि (इंटर्नशिप सहित) प्रवेश की तिथि से 10 वर्ष ही रहेगी। इस नियम में कोई ढील नहीं दी गई है।

एनएमसी ने सभी संबंधित विश्वविद्यालयों, मेडिकल कॉलेजों और अन्य हितधारकों को निर्देश दिया है कि वे इस फैसले पर ध्यान दें और योग्य मामलों का निपटारा इसी आधार पर करें।