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जब याचिका ही देनी थी तो CJI को चिट्ठी क्यों लिखी? अभिषेक मनु सिंघवी ने विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट रुख पर दिया जवाब

राहुल गांधी समेत 11 विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की PIL; CJI से मुलाकात का आवेदन खारिज होने के बाद विधिक मार्ग से कोर्ट पहुंचा विपक्ष।

 

नई दिल्ली (भदैनी मिरर डेस्क): विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), मतदाता सूची से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर रोक के खिलाफ विपक्षी दलों ('INDIA' ब्लॉक) ने देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में 11 प्रमुख विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की है।

इस बीच, पहले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) से मुलाकात के लिए पत्र लिखने और फिर याचिका दाखिल करने को लेकर उठ रहे सवालों पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने स्थिति स्पष्ट की है।

'चीफ जस्टिस पर कोई दबाव नहीं बनाया'

अभिषेक मनु सिंघवी ने चीफ जस्टिस पर दबाव बनाने के सत्ता पक्ष व अन्य आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्षी नेताओं ने केवल औपचारिक मुलाकात का समय मांगने के लिए पत्र लिखा था।

उन्होंने बताया कि CJI दफ्तर से मिले परामर्श और प्रक्रिया के अनुसार ही अब अदालत के समक्ष विधिक तरीके से याचिका दाखिल करने का फैसला लिया गया है।

प्रदर्शनकारियों को पैसे दिए जाने के आरोपों पर जवाब देते हुए सिंघवी ने कहा कि दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों में लोगों का शामिल होना जनता के गुस्से और असंतोष की स्वतःस्फूर्त अभिव्यक्ति है। लोग अपनी मर्जी से संविधान की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरे हैं।

CJI ऑफिस ने मुलाकात से किया था इनकार

सूत्रों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और 'INDIA' ब्लॉक के नेताओं द्वारा दिए गए मुलाकात के आवेदन को अस्वीकार कर दिया था।

11 अक्टूबर 2026 को CJI कार्यालय की ओर से ईमेल द्वारा नेताओं को सूचित किया गया था कि जिन राजनीतिक व चुनावी मुद्दों को वे उठाना चाहते हैं, वे या तो नीतिगत हैं या न्यायालय के विचाराधीन हैं। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर मुलाकात करना संवैधानिक मर्यादा के अनुकूल नहीं होगा। नेताओं को सलाह दी गई थी कि यदि वे अपने मौलिक अधिकारों के हनन का मुद्दा उठाना चाहते हैं, तो उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत की शरण लेनी चाहिए।

राहुल गांधी की लीगल टीम ने पूरी की फाइलिंग प्रक्रिया

पैदल मार्च के बीच राहुल गांधी की लीगल टीम सुप्रीम कोर्ट के फाइलिंग काउंटर पर पहुंची और वकीलों ने याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू कराई। राहुल गांधी स्वयं निर्धारित समय पर कोर्ट परिसर नहीं पहुंच सके थे, इसलिए उनकी ओर से उनके वकीलों ने औपचारिकताएं पूरी कीं। इस याचिका में राहुल गांधी मुख्य याचिकाकर्ता हैं।

याचिका में 11 प्रमुख नेताओं के नाम शामिल

सुप्रीम कोर्ट में दायर इस संयुक्त जनहित याचिका (PIL) में देश के 11 शीर्ष विपक्षी नेताओं के नाम शामिल हैं:

  1. राहुल गांधी (नेता प्रतिपक्ष)

  2. मल्लिकार्जुन खड़गे (कांग्रेस अध्यक्ष)

  3. अखिलेश यादव (सपा अध्यक्ष)

  4. तेजस्वी प्रसाद यादव (आरजेडी नेता)

  5. संजय राउत (शिवसेना - यूबीटी)

  6. सौगत रॉय (तृणमूल कांग्रेस)

  7. एम. ए. बेबी (सीपीएम)

  8. डी. राजा (सीपीआई)

  9. सुप्रिया सुले (एनसीपी - एसपी)

  10. महुआ माजी (झामुमो)

  11. ई. टी. मोहम्मद बशीर (आईयूएमएल)

याचिका में मुख्य रूप से मतदाता सूचियों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार को बहाल करने की मांग की गई है।