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Supreme Court: हवाई किराए की मनमानी वसूली पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- नियम न मानने वाली एयरलाइंस को करें ग्राउंडेड

त्योहारों पर महंगे टिकट और छिपे शुल्कों से मिलेगा छुटकारा; कोर्ट ने सरकार को 3 हफ्ते में नए नियम लागू करने का दिया सख्त निर्देश।

 

नई दिल्ली: त्योहारों, छुट्टियों या आपात स्थिति के दौरान निजी एयरलाइंस द्वारा वसूले जाने वाले मनमाने हवाई किराए और छिपे हुए चार्जेस (Hidden Charges) से परेशान यात्रियों को जल्द बड़ी राहत मिल सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने एयरलाइंस की मनमानी पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो एयरलाइंस नए नियमों का पालन नहीं करेंगी, उन्हें उड़ान भरने से रोक (ग्राउंडेड कर) दिया जाए।

7 दिनों में प्रकाशित करें नियम, 3 हफ्ते में हों लागू

सुप्रीम कोर्ट जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन की जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान जब केंद्र सरकार ने सीलबंद लिफाफे में नए नियमों का मसौदा पेश किया, तो अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि इसे 7 दिनों के भीतर सार्वजनिक किया जाए।

केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) अनिल कौशिक ने पीठ को भरोसा दिलाया कि अंतिम दौर की वार्ता जारी है और तीन सप्ताह के भीतर 'भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024' के नए नियमों को अधिसूचित कर दिया जाएगा। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर तय की है।

यात्रियों की जेब पर डाका: याचिका में उठाए गए मुख्य मुद्दे

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र श्रीवास्तव ने एयरलाइंस द्वारा अपनाई जा रही अपारदर्शी नीतियों को उजागर किया:

  • सामान सीमा में कटौती: मुफ्त चेक-इन बैगेज की सीमा को 25 किलोग्राम से घटाकर 15 किलोग्राम कर दिया गया है।

  • सिंगल-पीस पॉलिसी: केवल एक ही बैग चेक-इन करने की इजाजत दी जा रही है। बैगेज न होने पर भी किराए में कोई छूट नहीं मिलती।

  • त्योहारों पर 'डायनेमिक प्राइसिंग' का खेल: त्योहारों या खराब मौसम के समय किराए कई गुना बढ़ जाते हैं, जिसका सबसे बुरा असर आम यात्रियों पर पड़ता है।

  • नियामक का अभाव: वर्तमान में कोई ऐसा स्वतंत्र नियामक नहीं है, जो किरायों की अधिकतम सीमा या हिडन चार्जेस की निष्पक्ष समीक्षा कर सके।

भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 से क्या बदलेगा?

जनवरी 2025 से लागू नए 'भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024' के तहत नियमों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब तक नए नियम अधिसूचित नहीं हो जाते, तब तक मौजूदा व्यवस्था प्रभावी रहेगी, लेकिन यात्रियों के मौलिक अधिकारों और हितों के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।