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मेट्रो और इंटरनेट बंद करने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: दिल्ली पुलिस कमिश्नर को अवमानना नोटिस, बैरिकेडिंग हटाने का आदेश

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन पर सुनवाई के दौरान SC की दो टूक; कहा- बिना बड़ी चुनौती के न रोकी जाए मेट्रो, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अवैध रूप से न करें हिरासत में

 

नई दिल्ली (भदैनी मिरर)। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन और इससे जुड़े सुरक्षा प्रतिबंधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने बिना किसी बड़ी कानून-व्यवस्था की चुनौती के दिल्ली में मेट्रो सेवाएं और इंटरनेट बंद किए जाने पर गहरी नाराजगी जताई है। इसके साथ ही आदेशों का पालन न करने पर दिल्ली पुलिस कमिश्नर को अवमानना का नोटिस जारी कर मंगलवार तक जवाब मांगा गया है।

सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश: मेट्रो और इंटरनेट हो बहाल

सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए बेंच ने अंतरिम आदेश जारी किया है कि जब तक कानून-व्यवस्था की कोई बहुत बड़ी चुनौती न हो, तब तक मेट्रो का संचालन पूरी तरह सामान्य रहना चाहिए। कोर्ट ने शहर भर में तुरंत इंटरनेट सेवाएं बहाल करने और पुलिस को पूरे शहर से अनावश्यक बैरिकेडिंग हटाने का निर्देश दिया है, जिसकी समीक्षा भी की जाएगी।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि शनिवार को कुल 303 मेट्रो स्टेशनों में से 45 स्टेशन बंद किए गए थे। इस पर अदालत ने संबंधित अधिकारियों से बंद किए गए मेट्रो स्टेशनों की डिटेल नक्शे पर दिखाने को कहा, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि इससे आम जनता पर कितना बुरा प्रभाव पड़ा।

वकीलों की हिरासत और वकीलों के काम पर टिप्पणी

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील शहदान फरासत ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन के दौरान वकीलों को भी जबरन घसीटकर बसों में भरा गया और दूर ले जाकर छोड़ दिया गया। इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि वकीलों को उनके पेशेवर काम से किसी भी कीमत पर रोका नहीं जा सकता है। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे पत्रकारों, नेताओं और आम नागरिकों को अवैध तरीके से हिरासत में नहीं लिया जा सकता।

9 अक्टूबर के आदेश का पालन न करने पर अवमानना कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने अपने 9 अक्टूबर के उस आदेश का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि मेट्रो स्टेशनों और सार्वजनिक परिवहन को डिस्टर्ब न किया जाए। इस आदेश के बावजूद मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने के बाद अदालत में अवमानना याचिकाएं दाखिल की गईं, जिस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।