'इस अदालत से इंसाफ की उम्मीद नहीं': अरविंद केजरीवाल ने जज पर लगाए गंभीर आरोप, केस से हटने की उठाई मांग
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ केजरीवाल ने गिनाईं 10 वजहें; विचारधारा से लेकर जांच एजेंसियों के प्रति 'नरमी' तक पर उठाए सवाल
नई दिल्ली। दिल्ली शराब नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक बेहद तल्ख दलील पेश की है। केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उनसे मांग की है कि वह इस केस की सुनवाई से खुद को अलग (Recuse) कर लें। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि अदालत के मन में उनके खिलाफ पहले से राय बन चुकी है।
विचारधारा और कार्यक्रमों पर उठाए सवाल
अदालत में करीब डेढ़ घंटे तक चली बहस के दौरान केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा के एक खास विचारधारा वाले संगठन 'अधिवक्ता परिषद' (जो RSS से जुड़ा है) के कार्यक्रमों में शामिल होने पर आपत्ति जताई। केजरीवाल ने कहा, "जस्टिस शर्मा इस संगठन के कार्यक्रमों में चार बार जा चुकी हैं। हम उस विचारधारा का खुलकर विरोध करते हैं, ऐसे में मेरे मन में शंका है कि क्या मुझे निष्पक्ष न्याय मिलेगा?"
केजरीवाल की 10 बड़ी दलीलें:
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पक्षपात का डर: केजरीवाल ने कहा कि आदेशों में एक खास पैटर्न दिखता है, जहां ED और CBI के हर तर्क को आंख मूंदकर स्वीकार कर लिया जाता है।
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सुनवाई में जल्दबाजी: उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रायल कोर्ट ने पूरे दिन की सुनवाई के बाद फैसला दिया था, लेकिन हाई कोर्ट ने महज 5 मिनट में उसे गलत बता दिया।
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एकतरफा आदेश: केजरीवाल के अनुसार, 9 मार्च की सुनवाई में उन्हें सुने बिना ही आदेश जारी कर दिए गए।
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एप्रूवर (गवाह) पर भरोसा: उन्होंने सवाल उठाया कि अदालत ने सरकारी गवाह के बयानों पर इतनी जल्दी भरोसा कैसे कर लिया।
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जांच अधिकारी को राहत: ट्रायल कोर्ट ने CBI के जिस अधिकारी (IO) के खिलाफ टिप्पणी की थी, हाई कोर्ट ने उसे राहत दे दी, जबकि उसने मांग भी नहीं की थी।
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गृह मंत्री का बयान: केजरीवाल ने एक टीवी कार्यक्रम का हवाला देते हुए कहा कि फैसला आने से पहले ही सरकार को कैसे पता चल जाता है कि आदेश उनके खिलाफ आएगा?
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सुप्रीम कोर्ट से झटके: उन्होंने दलील दी कि इसी अदालत के तीन आदेशों को सुप्रीम कोर्ट पलट चुका है, जो दिखाता है कि यहां की कार्यवाही एकतरफा है।
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तेज गति: विपक्षी नेताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई जितनी तेजी से इस अदालत में हो रही है, वैसी गति अन्य केसों में नहीं दिखती।
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आरोपों की भाषा: केजरीवाल ने कहा कि चार्जशीट दाखिल होने से पहले ही अदालत ने उन्हें 'भ्रष्ट' जैसी टिप्पणियों से संबोधित किया।
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सोशल मीडिया ट्रेंड्स: उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं और जजों के करीबियों के जुड़ाव का भी हवाला दिया।
जस्टिस शर्मा और कोर्ट का रुख
इन आरोपों पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने हमेशा कानूनी दायरे में रहकर काम किया है। उन्होंने केजरीवाल से पूछा कि क्या उन कार्यक्रमों में उन्होंने कोई राजनीतिक बात की थी या वे केवल कानूनी चर्चाएं थीं? अब हाई कोर्ट की एक अलग बेंच यह तय करेगी कि क्या जस्टिस शर्मा को इस मामले की सुनवाई जारी रखनी चाहिए या नहीं।
क्या होता है 'रिक्यूजल' (Recusal)?
कानून के मुताबिक, यदि किसी पक्ष को लगे कि जज निष्पक्ष नहीं रह सकते या उनका किसी पक्ष से निजी जुड़ाव है, तो वह 'रिक्यूजल' की मांग कर सकता है। यह एक कानूनी अधिकार है ताकि न्याय की पारदर्शिता बनी रहे।