CBI की 'जल्दबाजी' के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे केजरीवाल और सिसोदिया: कहा— फैसले के 4 घंटे में याचिका लगाना एजेंसी की बदनीयती
'फैसला पढ़े बिना दायर की याचिका'— AAP नेताओं ने हाईकोर्ट से अपील खारिज करने की मांग की
नई दिल्ली (भदैनी मिरर)। दिल्ली के बहुचर्चित आबकारी नीति (शराब घोटाला) मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सीबीआई की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में आवेदन दाखिल किया है।
निचली अदालत से सभी 23 आरोपियों के बरी होने के महज चार घंटे के भीतर सीबीआई द्वारा पुनरीक्षण याचिका (Revision Petition) दाखिल किए जाने को केजरीवाल और सिसोदिया ने "अभूतपूर्व जल्दबाजी" और "गैर-गंभीर रवैया" करार दिया है। दोनों नेताओं ने हाईकोर्ट से सीबीआई की याचिका को खारिज करने की गुहार लगाई है।
'सीबीआई के पास कोई सबूत नहीं, मुकदमे में फंसाए रखने की कोशिश'
हाईकोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तर्क दिया है कि निचली अदालत का 234 पन्नों का विस्तृत फैसला पूरी तरह पढ़े और समझे बिना ही सीबीआई ने उच्च अदालत का रुख किया।
याचिका में मुख्य बिंदु:
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अभूतपूर्व जल्दबाजी: निर्णय आने के केवल 4 घंटे के भीतर याचिका दायर करना यह दर्शाता है कि एजेंसी का मकसद सिर्फ नेताओं को मुकदमे में उलझाए रखना है।
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साक्ष्यों का अभाव: राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट माना था कि सीबीआई ऐसा कोई प्राथमिक साक्ष्य या तथ्य पेश नहीं कर सकी, जिससे आबकारी नीति में किसी घोटाले की पुष्टि होती हो।
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प्रारंभिक स्तर पर खारिज मामला: याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह मामला आरोप (Charges) तय होने के पहले स्तर पर ही खारिज हो चुका है और गवाहों के बयान दर्ज करने तक की नौबत नहीं आई।
27 फरवरी को राउज एवेन्यू कोर्ट से बरी हुए थे 23 आरोपी
उल्लेखनीय है कि 27 फरवरी को दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने कथित आबकारी नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और बीआरएस नेता के. कविता सहित सभी 23 आरोपियों को आरोपमुक्त (Discharge) कर दिया था।
इसके तुरंत बाद सीबीआई ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया था कि निचली अदालत ने जांच के कई महत्वपूर्ण पहलुओं और साक्ष्यों को नजरअंदाज किया है।
अगले सप्ताह हो सकती है सुनवाई
केजरीवाल और सिसोदिया ने हाईकोर्ट से मांग की है कि सीबीआई की इस पुनरीक्षण याचिका को तुरंत खारिज किया जाए, ताकि अदालत और संबंधित पक्षों का समय बर्बाद न हो। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा इस मामले पर अगले सप्ताह सुनवाई किए जाने की संभावना है।