PM मोदी बोले- भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत के आधे से भी कम
दिल्ली में NGT के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन, 17 देशों के न्यायिक प्रतिनिधियों ने पर्यावरण और जलवायु चुनौतियों पर की चर्चा
नई दिल्ली, 19 सितंबर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भारत के दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत के आधे से भी कम है। उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस तथ्य को मजबूती से रखता रहा है।
प्रधानमंत्री ने दिल्ली में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की ओर से आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स’ का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने NGT मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया। सम्मेलन में पर्यावरण और जलवायु से जुड़े गंभीर मुद्दों के साथ-साथ न्यायिक दृष्टिकोण और पर्यावरणीय शासन को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की जा रही है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत सदियों से प्रकृति और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को लेकर दुनिया का मार्गदर्शन करता आया है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और अनुभवों को आधार बनाकर आधुनिक जलवायु चुनौतियों के समाधान प्रस्तुत कर रहा है और पूरी मानवता से सामूहिक प्रयासों का आह्वान कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कार्बन उत्सर्जन की जिम्मेदारी विकासशील देशों पर गलत तरीके से डाली गई है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक वास्तविकता यह है कि भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन आज भी वैश्विक औसत के आधे से कम है। पीएम मोदी के मुताबिक, विकसित देशों में प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन भारत की तुलना में करीब छह गुना अधिक है।
उन्होंने कहा कि भारत इस तथ्य को वैश्विक मंचों पर मजबूती और स्पष्टता के साथ रखता है। प्रधानमंत्री ने भारतीयों से भी अपनी परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण की क्षमता को लेकर आत्मविश्वास बनाए रखने की अपील की।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने अपनी सदियों पुरानी परंपराओं और आंतरिक ताकत को दुनिया के सामने रखा है। उन्होंने पेरिस में आयोजित COP21 का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री के अनुसार, इसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए भारत ने COP21 के दौरान ‘Convenient Action: Continuity for Change’ नामक पुस्तक भी जारी की थी।
दो दिवसीय सम्मेलन में 17 देशों के प्रमुख न्यायाधीश और न्यायिक प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन में नीति निर्माण में मौजूद कमियों, नीतियों के क्रियान्वयन और प्रवर्तन से जुड़ी चुनौतियों तथा पर्यावरणीय शासन को मजबूत करने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। साथ ही विभिन्न देशों के बीच संस्थागत सहयोग बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा होगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया को साथ लेकर पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।