दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर खुद पुलिसवालों का ऐतिहासिक प्रदर्शन; ACP मनस्वी वशिष्ठ निलंबित
वकीलों के साथ टकराव और अधिकारियों के तबादले के खिलाफ सड़कों पर उतरे दिल्ली पुलिसकर्मी; सोशल मीडिया पर वायरल हुई तीखी प्रतिक्रियाएं।
स्पेशल डेस्क, भदैनी मिरर: राजधानी दिल्ली में एक बेहद अनोखा और अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला, जब कानून-व्यवस्था संभालने वाली दिल्ली पुलिस खुद सड़कों पर उतर आई। वकीलों के साथ हुए हालिया टकराव और अपने दो अधिकारियों के तबादले से नाराज दर्जनों पुलिसकर्मियों ने दिल्ली पुलिस मुख्यालय (Delhi Police Headquarters) के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इस मामले में प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले एसीपी मनस्वी वशिष्ठ (Manasvi Vashisth) को निलंबित कर दिया गया है।
क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा मामला पूर्वी दिल्ली के शाहदरा में वकीलों और पुलिस के बीच हुए हालिया टकराव से जुड़ा है।
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तबादले की कार्रवाई: वकील ललित बंसल पर हमले के मामले में पुलिस कार्रवाई के विरोध में शहर के वकील अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे। इसके बाद दबाव में आकर दिल्ली पुलिस ने एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के एसएचओ अरुण कुमार का तबादला कर दिया था।
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पुलिसकर्मियों का गुस्सा: अपने अधिकारियों के अचानक हुए तबादले से नाराज उत्तर-पूर्वी जिले के करीब 100 पुलिसकर्मी (महिला और पुरुष) सोमवार सुबह करीब 8 बजे पुलिस मुख्यालय के बाहर जमा हो गए।
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मुख्यालय के अंदर धरना: प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मी नारेबाजी करते हुए मुख्यालय के अंदर दाखिल हो गए और अभूतपूर्व तरीके से धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि थानों के अंदर पुलिसकर्मी सुरक्षित नहीं हैं, तो वे आम जनता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेंगे।
मोहम्मद जुबैर की पोस्ट और नेहा बोरा की तंजभरी टिप्पणी
इस नाटकीय घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस पर कई राजनीतिक हस्तियों और सोशल मीडिया यूजर्स की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं:
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फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर ने एक वीडियो रीपोस्ट करते हुए लिखा, "उम्मीद है कि नेहा बोरा दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के इस विरोध-प्रदर्शन का समर्थन करेंगी और इसमें शामिल होंगी।"
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जुबैर की इस पोस्ट का जवाब देते हुए एक्टिविस्ट व टिप्पणीकार नेहा बोरा ने लिखा, "मुझे हैरानी है कि अगर आप दिल्ली पुलिस के समर्थन में, दिल्ली पुलिस के ही खिलाफ प्रदर्शन करते हैं, और वह भी ऐसे इलाके में जहाँ दिल्ली पुलिस ने धारा 163 लागू कर रखी है, तो क्या आपको हिरासत में ले लिया जाएगा?"
इसके अलावा, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी इस अनोखे 'पुलिस बनाम पुलिस' प्रदर्शन पर जमकर चुटकी ली।
कानून क्या कहता है? (पुलिस-फोर्स एक्ट, 1966)
आम तौर पर पुलिसकर्मी अपनी मांगों, तबादलों या अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर आम नागरिकों की तरह सड़कों पर सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं कर सकते। देश में पुलिस-फॉरसेज (रिस्ट्रिक्शन ऑफ राइट्स) एक्ट, 1966 लागू है, जिसका उद्देश्य पुलिस बल में अनुशासन बनाए रखना और उनके कुछ मौलिक अधिकारों पर सीमाएं तय करना है, ताकि कानून-व्यवस्था से कोई समझौता न हो।
बहरहाल, दिल्ली पुलिस के इतिहास में यह पहली बार देखा गया जब खुद पुलिसकर्मियों ने अपने ही उच्चाधिकारियों और फैसलों के खिलाफ मुख्यालय के भीतर इस तरह का मोर्चा खोला। फिलहाल पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक कर स्थिति को संभालने की कोशिश की है, लेकिन इस घटना ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।