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Delhi Police Controversy: जंतर-मंतर पर बिना नेम प्लेट के क्यों दिखे दिल्ली पुलिसकर्मी

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने पहुँची पुलिस पर नेम टैग हटाने के आरोप; स्टैंडिंग ऑर्डर 51 और डीके बासु फैसले का हवाला देकर उठे सवाल।

 

भदैनी मिरर नेशनल डेस्क: नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान एक नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए तैनात कई दिल्ली पुलिसकर्मी अपनी वर्दी पर अनिवार्य 'नेम प्लेट' (Name Tag) के बिना नजर आए।

इस घटना के बाद पुलिस की नीयत और पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं, जिसके बाद नई दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त (DCP) सचिन शर्मा को स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा है।

DCP की सफाई: 'ड्यूटी के दौरान टूट जाते हैं नेम टैग, नहीं दिए गए कोई निर्देश'

सोशल मीडिया पर चल रही उन अटकलों को खारिज करते हुए, जिनमें कहा जा रहा था कि पुलिसकर्मियों को ट्रोलिंग से बचाने के लिए नेम टैग हटाने के निर्देश दिए गए थे, DCP सचिन शर्मा ने स्थिति स्पष्ट की।

DCP सचिन शर्मा ने बताया, "पुलिस प्रशासन की ओर से नेम टैग न पहनने को लेकर कोई निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। भीड़ को नियंत्रित करने और धक्का-मुक्की के दौरान कुछ कर्मियों के नेम टैग टूट गए होंगे। ड्यूटी पर मौजूद सभी पुलिसकर्मियों के लिए नेम टैग पहनना अनिवार्य है।"

हालाँकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि जुलाई में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के 'चलो संसद' मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद कुछ अधिकारियों को उनके नेम टैग से पहचानकर सोशल मीडिया पर ट्रोल किया गया था।

स्टैंडिंग ऑर्डर 51 और सुप्रीम कोर्ट के नियमों का उल्लंघन?

दिल्ली पुलिस के अपने नियमों (Delhi Police Standing Order No 51) के अनुसार, हर पुलिसकर्मी को अपनी वर्दी पर काले बैकग्राउंड में सफेद अक्षरों वाली द्विभाषी (Bilingual) प्लास्टिक नेम प्लेट पहनना अनिवार्य है।

इस मामले में भाकपा (CPI) के राज्यसभा सांसद पी. संदोष कुमार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। 2 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए सांसद ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक 'डीके बासु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य' मामले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि गिरफ्तारी या हिरासत के दौरान पुलिसकर्मियों के पास सटीक, स्पष्ट और दृश्यमान पहचान व पदनाम टैग होना अनिवार्य है।

क्यों हो रहा है जंतर-मंतर पर प्रदर्शन?

जंतर-मंतर पर यह विरोध प्रदर्शन एक मीडिया रिपोर्ट के बाद भड़का है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के सामने 10 महीनों में 14 बार आधिकारिक आपत्ति दर्ज कराई थी।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत करोड़ों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जिसे वे 'वोट चोरी' करार देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।