Delhi Metro Supreme Court: DMRC ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी बिना शर्त माफी, बताया- प्रदर्शन के दिन बंद नहीं हुई थी मेट्रो सेवा
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान 85% स्टेशन रहे चालू; DMRC ने कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा— 271 ट्रेनों ने लगाए 4,157 फेरे।
भदैनी मिरर नेशनल डेस्क: दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अवमानना याचिका के जवाब में एक हलफनामा पेश कर अदालत से बिना शर्त माफी मांगी है। DMRC की चेयरपर्सन डी. थारा (IAS) की ओर से दायर इस हलफनामे में स्पष्ट किया गया कि राष्ट्रीय राजधानी में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ हाल ही में हुए CJP के विरोध-प्रदर्शन के दिन मेट्रो की ट्रेनों या सेवाओं में कोई कटौती नहीं की गई थी।
85% मेट्रो स्टेशन यात्रियों के लिए पूरी तरह थे चालू
अदालत को दी गई जानकारी के अनुसार:
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10 अक्टूबर को मेट्रो नेटवर्क के 303 स्टेशनों में से 258 स्टेशन (85% से अधिक) यात्रियों के लिए पूरी तरह चालू और उपलब्ध थे।
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केवल 45 स्टेशनों (नेटवर्क का लगभग 15%) पर दिल्ली पुलिस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सुरक्षा आकलन के निर्देशों के बाद प्रवेश और निकास (Entry/Exit) पर पाबंदी लगाई गई थी।
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शुरुआत में पुलिस ने 57 स्टेशनों को बंद करने का निर्देश दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद सुरक्षा जरूरतों की दोबारा समीक्षा की गई और यह संख्या घटाकर 45 कर दी गई।
4,157 फेरे और 32 लाख यात्रियों ने किया सफर
DMRC ने हलफनामे में आंकड़ों का ब्योरा देते हुए बताया कि 10 अक्टूबर को ट्रिप्स (फेरों) की संख्या में कोई कमी नहीं की गई थी। उस दिन कुल 271 ट्रेनें सेवा में लगाई गई थीं और किसी भी सामान्य दिन की तरह 4,157 फेरे पूरे किए गए थे।
हालांकि, पाबंदियों और विरोध-प्रदर्शन के माहौल के कारण 10 अक्टूबर को यात्रियों की संख्या घटकर लगभग 32 लाख रही, जबकि आम तौर पर महीने के दूसरे शनिवार को यह संख्या करीब 58 लाख रहती है। DMRC ने कहा कि यात्रियों की संख्या में आई इस गिरावट की वजह विरोध-प्रदर्शन के कारण लोगों का सफर न करने का फैसला हो सकता है।
'याचिकाकर्ताओं ने दी गलत जानकारी', रात 10 बजे हटीं पाबंदियां
DMRC ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को यह गलत जानकारी दी थी कि जरूरी सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह बंद कर दिया गया था। DMRC ने यह भी जानकारी दी कि 10 अक्टूबर को रात 10 बजे तक सभी 45 स्टेशनों पर लगी प्रवेश-निकास की पाबंदियां पूरी तरह हटा ली गई थीं।
गौरतलब है कि प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मेट्रो परिचालन और दिल्ली आने वाली ट्रेनों पर 'पूर्ण रोक' न लगाने का निर्देश देते हुए DMRC को अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था, जिसके जवाब में यह रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।