{"vars":{"id": "125128:4947"}}

करिश्मा कपूर के बच्चों को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी जीत: सौतेली मां प्रिया कपूर पर लगी पाबंदी, 30 हजार करोड़ की संपत्ति 'फ्रीज'

कोर्ट का कड़ा रुख: संजय कपूर की तीसरी पत्नी प्रिया कपूर अब नहीं कर सकेंगी संपत्ति का लेन-देन।

 

नई दिल्ली (भदैनी मिरर): फिल्म अभिनेत्री करिश्मा कपूर के बच्चों, कियान और समायरा राज कपूर के लिए कानूनी मोर्चे पर गुरुवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी करते हुए उनके दिवंगत पिता और मशहूर कारोबारी संजय कपूर की संपत्ति पर उनकी सौतेली मां प्रिया कपूर के अधिकारों को सीमित कर दिया है।

संपत्ति और बैंक खातों पर लगी रोक

जस्टिस ज्योति सिंह की पीठ ने आदेश दिया है कि संजय कपूर की संपत्ति से फिलहाल किसी भी प्रकार का लेन-देन नहीं किया जाएगा। अदालत ने स्पष्ट रूप से उनके बैंक खातों और विदेश में मौजूद क्रिप्टोकरेंसी होल्डिंग्स को 'निष्क्रिय' (Inactive) रखने का निर्देश दिया है। कोर्ट का मानना है कि ट्रायल लंबा खिंच सकता है, ऐसे में अंतिम फैसला आने तक संपत्ति को सुरक्षित रखना अनिवार्य है ताकि उसमें कोई हेरफेर न हो सके।

30 हजार करोड़ की संपत्ति और 'फर्जी वसीयत' का विवाद

पिछले साल जून में लंदन में निधन हुए दिग्गज कारोबारी संजय कपूर अपने पीछे करीब 30,000 करोड़ रुपये की विशाल संपत्ति छोड़ गए हैं। करिश्मा कपूर के बच्चों ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उनकी सौतेली मां प्रिया कपूर ने उनके पिता के नाम पर एक 'फर्जी और मनगढ़ंत वसीयत' तैयार की है। बच्चों ने आशंका जताई थी कि वसीयत के आधार पर संपत्तियों को खुर्द-बुर्द किया जा सकता है।

प्रिया कपूर को देना होगा जवाब

हाई कोर्ट ने कहा है कि पहली नजर में बच्चों का पक्ष मजबूत दिख रहा है। अब वसीयत की प्रामाणिकता साबित करने की पूरी जिम्मेदारी प्रिया कपूर पर है। अदालत ने आदेश दिया है कि संपत्ति की स्थिति (Status Quo) में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है पारिवारिक विवाद

बता दें कि यह विवाद केवल बच्चों तक सीमित नहीं है। संजय कपूर की 80 वर्षीय मां रानी कपूर ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके नाम पर बना 'फैमिली ट्रस्ट' फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया गया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रिया कपूर को नोटिस जारी करते हुए दोनों पक्षों को मध्यस्थता (Mediation) का सुझाव दिया है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 7 मई को होगी।