DDA Freehold Property HC Decision: ₹155 करोड़ वसूलने के बाद भी आवेदन लटकाए बैठा DDA, दिल्ली हाईकोर्ट की सख्त हिदायत- 2 महीने में लें फैसला
लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड से जुड़ी 1,373 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट का बड़ा आदेश; MoHUA सचिव और DDA उपाध्यक्ष 11 दिसंबर को कोर्ट में होंगे पेश।
कानूनी डेस्क/नई दिल्ली (भदैनी मिरर): दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) द्वारा संपत्तियों को 'लीजहोल्ड' से 'फ्रीहोल्ड' में बदलने के आवेदनों पर फैसला न लेने और ढिलाई बरतने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। उच्च न्यायालय ने डीडीए को सख्त निर्देश दिया है कि वह लंबित पड़े 1,373 आवेदनों पर अगले दो महीनों के भीतर तत्कालीन/मौजूदा नीति के तहत अंतिम निर्णय ले।
अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि डीडीए आवेदकों से ₹155.06 करोड़ का कन्वर्जन शुल्क पहले ही वसूल चुका है, इसके बावजूद फैसला लटका कर बैठा है, जिससे दिल्ली के निवासियों को भारी मानसिक और वित्तीय परेशानी झेलनी पड़ रही है।
₹155 करोड़ वसूलने के बावजूद अटके हैं Conveyance Deed
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह एवं न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ डीडीए के रवैये से पीड़ित संपत्ति मालिकों की याचिकाओं के समूह पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा कि साल 2020 से लेकर 2026 तक फ्रीहोल्ड कन्वर्जन के 1,373 आवेदन लंबित पड़े हैं।
हैरानी की बात यह है कि इनमें से 308 आवेदनों को मंजूरी भी मिल चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद उनके स्वामित्व हस्तांतरण दस्तावेज यानी 'कन्वेयंस डीड' (Conveyance Deed) निष्पादित नहीं किए गए हैं। पीठ ने कहा कि जिन संपत्ति मालिकों ने तत्कालीन निर्धारित शुल्क जमा कर दिया है, उन्हें इस तरह अनिश्चितकाल तक इंतजार कराना बेहद गंभीर और चिंताजनक है।
मौजूदा नीति से निपटें पुराने आवेदन, भविष्य के लिए बने नई नीति
अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया कि जितने भी आवेदन पूर्व में आ चुके हैं और जिनका शुल्क जमा हो चुका है, उन्हें उस समय लागू मौजूदा नीति के तहत ही दो महीने में निपटाया जाए। वहीं भविष्य में आने वाले नए आवेदनों के लिए आवास एवं शहरी मामलों का मंत्रालय (MoHUA) और DDA एक नई नीति तैयार कर सकते हैं।
11 दिसंबर को अगली सुनवाई, DDA उपाध्यक्ष तलब
हाईकोर्ट ने दिल्लीवासियों की इस गंभीर समस्या को देखते हुए मामले की अगली सुनवाई 11 दिसंबर तय की है। पीठ ने आदेश दिया है कि आगामी सुनवाई पर आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) के सचिव और DDA के उपाध्यक्ष (Vice Chairman) को व्यक्तिगत या वर्चुअल रूप से अदालत की कार्यवाही में उपस्थित रहना होगा।