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भारत मंडपम में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: विदेशी मेहमान चखेंगे भारत का देसी स्वाद, पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को भेंट की 'तिरुक्कुरल'

विदेशी नेताओं के लिए खास देसी व्यंजन का मेन्यू तैयार; पीएम मोदी और पुतिन की द्विपक्षीय बैठक में 100 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य पर चर्चा।

 

भदैनी मिरर (अंतरराष्ट्रीय डेस्क)

नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का भव्य आगाज हो गया है। 11 से 13 सितंबर तक आयोजित इस सम्मेलन में सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच विदेशी मेहमानों के स्वागत की विशेष तैयारियां की गई हैं। सम्मेलन में ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समेत कई सहयोगी देशों के शीर्ष नेता भाग ले रहे हैं।

बंगाल की निमकी से तमिलनाडु के मुरुक्कू तक का स्वाद

विदेशी डेलिगेशन के लिए ताज महल और द ललित जैसे देश के नामचीन लग्जरी होटल्स स्पेशल मेन्यू तैयार कर रहे हैं। ताज महल होटल के शेफ 'ट्रेडिशन टू टेबल' थीम के तहत भारत के 6 अलग-अलग क्षेत्रों के क्षेत्रीय जायके परोसेंगे। इस खास मेन्यू में बंगाल की प्रसिद्ध 'निमकी' से लेकर तमिलनाडु के स्वादिष्ट 'मुरुक्कू' तक शामिल हैं, जो भारत की पाक कला की विविधता, समृद्धि और आतिथ्य सत्कार की भावना को प्रदर्शित करेंगे।

पीएम मोदी और पुतिन की द्विपक्षीय वार्ता, 'तमिल वेद' की भेंट

सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भारत मंडपम में एक अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, ऊर्जा, और रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति बनी। इस दौरान पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को तमिल संत व कवि तिरुवल्लुवर की प्रसिद्ध रचना 'तिरुक्कुरल' का रूसी संस्करण भेंट किया। करीब 2000 साल पुरानी इस कालजयी रचना को 'तमिल वेद' के नाम से भी जाना जाता है।

बैठक के प्रमुख बिंदु:

  • 100 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य: वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का संकल्प।

  • औद्योगिक व स्टील सेक्टर: INNOPROM के जरिए औद्योगिक सहयोग और स्टील वैल्यू चेन का विकास करना।

  • सिविल न्यूक्लियर सहयोग: परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में फ्यूल साइकिल और लाइफ साइकिल सपोर्ट को मजबूत करना।

  • कौशल और उर्वरक क्षेत्र: रूस में भारतीय कुशल श्रमिकों की आवाजाही बढ़ाना और फर्टिलाइजर क्षेत्र में जॉइंट वेंचर (JV) प्रोजेक्ट्स के माध्यम से साझेदारी को विस्तार देना।

वैश्विक चुनौतियों के बीच ऐतिहासिक समिट

यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब दुनिया वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया संकट और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों के प्रभाव से जूझ रही है। ऐसे माहौल में भारत का यह मंच वैश्विक कूटनीति और क्षेत्रीय स्वाद का एक अनूठा संगम बन गया है।