{"vars":{"id": "125128:4947"}}

वाराणसी: जिला जज की कुर्सी पर बैठकर ऑर्डर देने वाली महिला पर केस 

न्यायालय सुरक्षा प्रभारी की तहरीर पर कैंट थाने में दर्ज हुई एफआईआर 
 

 

वाराणसी, भदैनी मिरर: काशी की जिला अदालत (कचहरी) से एक बेहद चौंकाने वाला और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला सुरक्षा घेरे को ठेंगा दिखाते हुए सीधे माननीय न्यायाधीश (जज) की कुर्सी पर जाकर बैठ गई। इस दुस्साहस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कैंट थाने की पुलिस ने शनिवार को आरोपी महिला के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

क्या है पूरा मामला?

मामला वाराणसी के एडीजे प्रथम (ADJ-1) न्यायालय का है। पुलिस को दी गई तहरीर के अनुसार, शुक्रवार (12 जून 2026) की सुबह करीब 10:00 बजे शिपुर थाना क्षेत्र के पंचकोशी रोड  की रहने वाली वंदना गुप्ता (50 वर्ष) अचानक कोर्ट रूम में दाखिल हुई। उस समय अदालत में सुरक्षाकर्मी मौजूद नहीं थे। महिला सीधे आगे बढ़ी और न्यायाधीश की खाली कुर्सी पर जाकर बैठ गई।

यह नजारा देखकर कोर्ट रूम में मौजूद वकीलों और कर्मचारियों के होश उड़ गए। कोर्ट स्टाफ ने तत्काल सक्रियता दिखाते हुए महिला को समझा-बुझाकर कुर्सी से उतारा और वहां से विदा किया, जिसके बाद वह अपने घर चली गई। कोर्ट परिसर में इस हरकत से सरकारी व न्यायिक कार्यों में अवरोध (बाधा) उत्पन्न हुआ। महिला की इस हरकत से कोर्ट रूम में अफरा-तफरी मच गई और अदालती कार्यवाही ठप हो गई।

न्यायाधीश भड़के, सुरक्षाकर्मियों को लगाई फटकार

शुक्रवार को जब यह घटना हुई, तो जानकारी मिलते ही अपर जिला जज (ADJ) यजुवेंद्र विक्रम सिंह मौके पर पहुंच गए। कोर्ट रूम की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक और जज की कुर्सी की गरिमा से हुए खिलवाड़ को देख वे बेहद नाराज हो गए। उन्होंने सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों को जमकर फटकार लगाई और पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की।


कैंट थाने में मुकदमा दर्ज, वैधानिक कार्रवाई शुरू

इस घटना के बाद न्यायालय सुरक्षा प्रभारी (उपनिरीक्षक) प्रद्युम्न सिंह ने कैंट थाने में लिखित तहरीर दी। तहरीर में आरोप लगाया गया है कि महिला वंदना गुप्ता द्वारा लगातार न्यायिक कार्य और सरकारी ड्यूटी में बाधा उत्पन्न की जा रही है।
कैंट थाना पुलिस ने सुरक्षाकर्मी की तहरीर के आधार पर आरोपी महिला के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है और मामले की वैधानिक जांच शुरू कर दी है। कचहरी जैसे संवेदनशील इलाके में हुई इस घटना ने कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।