Varanasi: 5 साल की बच्ची से दरिंदगी में किशोर को 20 साल की कठोर कैद, बालिग की तरह चला मुकदमा
लालपुर-पांडेयपुर में 2021 में मासूम से हुआ था दुष्कर्म; पॉक्सो कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया
वाराणसी / भदैनी मिरर: वाराणसी की विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) नितिन पांडेय की अदालत ने 5 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के गंभीर मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले में दोषी बाल अपचारी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 40 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। इस मामले की सबसे खास बात यह रही कि बाल अपचारी पर बालिग (वयस्क) की तरह मुकदमा चलाया गया।
टॉफी का लालच देकर सुनसान जगह ले गया था आरोपी
विशेष लोक अभियोजक संतोष कुमार सिंह द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, घटना लालपुर-पांडेयपुर थाना क्षेत्र की है। पीड़िता के पिता ने 26 मार्च 2021 को थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
शिकायत के मुताबिक, रिश्ते में चाचा लगने वाला 16 वर्षीय किशोर बच्ची को टॉफी दिलाने के बहाने बहला-फुसलाकर सुनसान स्थान पर ले गया था, जहां उसने मासूम के साथ इस हैवानियत को अंजाम दिया। घटना के बाद बच्ची लहूलुहान और गंभीर हालत में रोते हुए अपने घर पहुंची थी।
मानसिक क्षमता की जांच के बाद चला बालिग की तरह मुकदमा
मामले में किशोर न्याय बोर्ड (JJB) ने जांच के दौरान पाया कि अपराध करते समय 16 वर्षीय किशोर अपने कृत्य और उसके गंभीर परिणामों को समझने की पूरी मानसिक क्षमता रखता था। इसके बाद मामले का विचारण (Trial) सामान्य किशोर की बजाय बालिग की तरह किया गया।
अभियोजन पक्ष की ओर से अपराध सिद्ध करने के लिए कोर्ट में 6 मुख्य गवाह पेश किए गए, जिनमें पीड़िता के माता-पिता, इलाज करने वाले चिकित्सक, विवेचक (IO) और प्राथमिकी दर्ज करने वाले पुलिसकर्मी शामिल थे। चिकित्सीय साक्ष्यों और गवाहों के सुदृढ़ बयानों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।
अर्थदंड का 50 फीसदी पीड़िता को प्रतिकर के रूप में मिलेगा
निर्णय सुनाते समय न्यायालय ने किशोर न्याय अधिनियम का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि इस अधिनियम के तहत किसी भी किशोर को मृत्युदंड या आजीवन कारावास नहीं दिया जा सकता। हालांकि, अबोध बालिका के साथ हुए इस जघन्य अपराध की गंभीरता को देखते हुए अधिकतम अनुमन्य दंड (20 वर्ष की कैद) देना ही न्यायोचित है।
अदालत ने यह भी तय किया कि:
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अर्थदंड की जिम्मेदारी: 40 हजार रुपये के अर्थदंड के भुगतान का मुख्य दायित्व किशोर के माता-पिता पर होगा।
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पीड़िता को मदद: जमा कराए गए अर्थदंड की 50 प्रतिशत राशि (20,000 रुपये) पीड़िता को मुआवजे (प्रतिकर) के रूप में दी जाएगी।
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पुनर्वास के निर्देश: इसके साथ ही अदालत ने सजा काट रहे किशोर के पुनर्वास को लेकर भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।