Varanasi News: वाराणसी में अंतर्राज्यीय गौ तस्करी गिरोह का पर्दाफाश; लंका पुलिस ने 4 तस्करों को दबोचा, 16 गोवंश व DCM बरामद
डाफी टोल प्लाजा के पास तड़के हुई बड़ी कार्रवाई; क्रूरता से डीसीएम में लादे गए थे गोवंश, छत्तीसगढ़ के 'हेमंत' नेटवर्क और रूट की जांच में जुटी पुलिस।
वाराणसी (भदैनी मिरर ब्यूरो) : वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट के सोमवार तड़के लंका थाना पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने रमना स्थित डाफी टोल प्लाजा के पास घेराबंदी कर एक अंतर्राज्यीय गौ तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने चार शातिर तस्करों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक विधि-विरुद्ध बालक (किशोर) को अपनी अभिरक्षा में लिया है।
पुलिस ने तस्करों के कब्जे से क्रूरतापूर्वक क्रैम करके लादे गए कुल 16 गोवंश (11 गाय और 5 अन्य गोवंश) को मुक्त कराया है। साथ ही तस्करी में इस्तेमाल की जा रही एक आइसर डीसीएम ट्रक को भी जब्त कर लिया है।
टोल प्लाजा के पास घेराबंदी कर दबोचे गए आरोपी
एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार ने बताया कि सोमवार सुबह करीब 4:00 बजे मुखबिर की सूचना पर लंका पुलिस ने रमना डाफी टोल प्लाजा के पास चेकिंग बढ़ा दी। इसी दौरान एक संदिग्ध डीसीएम गाड़ी आती दिखाई दी। पुलिस ने जब घेराबंदी कर वाहन को रोका और उसकी तलाशी ली, तो उसमें अत्यंत क्रूरता के साथ 16 गोवंश ठूंस-ठूंस कर लदे मिले। पुलिस ने तुरंत मौके से गाड़ी में सवार चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शिवेन्द्र सिंह निवासी सीधी (मध्य प्रदेश), छोटू सिंह निवासी सीधी (मध्य प्रदेश), अभिषेक तिवारी निवासी कोरबा (छत्तीसगढ़), आशू खरवार निवासी प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश) के अलावा प्रतापगढ़ के ही एक 17 वर्षीय किशोर को विधिक प्रक्रिया के तहत पुलिस अभिरक्षा में लिया गया है।
पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा: छत्तीसगढ़ से जुड़ा है नेटवर्क
पुलिस द्वारा की गई शुरुआती पूछताछ में इस गिरोह के अंतर्राज्यीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है। आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ सहित विभिन्न जिलों से गोवंश कलेक्ट (इकट्ठा) करते थे। हालांकि आरोपियों ने पहले पुलिस को गुमराह करने के लिए इन्हें दुधारू मवेशी बताया, लेकिन कड़ाई से पूछताछ करने पर सामने आया कि वे इन्हें छत्तीसगढ़ और बिहार के रास्ते ले जाकर आगे सप्लाई करने वाले थे।
इस पूरे नेटवर्क को ऑपरेट करने और सुरक्षित रूट व पुलिस लोकेशन की जानकारी देने के पीछे 'हेमंत' नाम के एक व्यक्ति का हाथ सामने आया है, जो छत्तीसगढ़ का रहने वाला बताया जा रहा है। गिरोह के कुछ सदस्य भाड़े पर रखे गए थे, जिनमें ड्राइवर और दैनिक मजदूरी वाले वर्कर शामिल हैं।
गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज, CDR खंगाल रही पुलिस
इस मामले में थाना लंका पर उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम की धारा 3, 5(ए), 5(बी), 8 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11 के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत किया गया है। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक अनिल कुमार को सौंपी गई है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पकड़े गए आरोपियों का फिलहाल कोई पुराना आपराधिक इतिहास सामने नहीं आया है और वे बहुत ज्यादा पढ़े-लिखे भी नहीं हैं। पुलिस अब इनके कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का गहराई से एनालिसिस कर रही है, ताकि इस लंबे रूट (प्रतापगढ़ से छत्तीसगढ़) के बीच पड़ने वाले सभी बॉर्डर्स को पार करने के इनके तरीके और मुख्य सरगना 'हेमंत' समेत पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जा सके।
सफल पुलिस टीम:
इस सराहनीय और सफल कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक राजकुमार, चौकी प्रभारी रमना उपनिरीक्षक पवन पांडेय, उपनिरीक्षक संगम कुमार सहित थाना लंका के अन्य पुलिस जवानों की मुख्य भूमिका रही।