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Varanasi: शारीरिक शोषण और अश्लील वीडियो बेचकर पैसा कमाने वाले को आजीवन कारावास, ₹2.80 लाख का जुर्माना
 

2022 में सीबीआई ने दिल्ली से दर्ज की थी एफआईआर; कैंट क्षेत्र की पीड़िता के जरिए खुला था अंतरराष्ट्रीय चाइल्ड पोर्नोग्राफी नेटवर्क
 

 

 विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट नितिन पाण्डेय की कोर्ट ने आरोपी रवि पटेल को सुनाई उम्रकैद की सजा 

 आरोपी पर लगे 2.80 लाख रुपये जुर्माने की 70 फीसदी रकम पीड़िता को देने का अदालती आदेश 

 चाइल्ड पोर्नोग्राफी में लिप्त व्यक्ति मानसिक रोगी होने के साथ समाज के लिए गंभीर खतरा है

भदैनी मिरर डेस्क।  वाराणसी की विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने एक नाबालिग बच्ची को ब्लैकमेल कर उसका शारीरिक शोषण करने, अश्लील (पोर्न) वीडियो बनाने और उसे बेचकर पैसे कमाने के संगीन मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट नितिन पाण्डेय की कोर्ट ने मुख्य आरोपी रवि पटेल को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है।

इसके साथ ही अदालत ने दोषी रवि पटेल पर 2 लाख 80 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोका है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जुर्माने की कुल राशि का 70 प्रतिशत हिस्सा पीड़ित मासूम बच्ची को मुआवजे के रूप में दिया जाएगा।

सीबीआई (CBI) की जांच से उजागर हुआ था पूरा मामला

प्रकरण के अनुसार, साल 2022 में केंद्र सरकार के संज्ञान में आया था कि कुछ लोग नाबालिग बच्चियों के अश्लील वीडियो और फोटो बनाकर उन्हें ऑनलाइन बेच रहे हैं और भारी मुनाफा कमा रहे हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी गई थी।

* कैंट थाने से जुड़ा तार: सीबीआई ने नई दिल्ली में आईटी एक्ट के तहत अज्ञात लोगों पर एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू की।
* डिजिटल साक्ष्य: जांच के दौरान सीबीआई के विवेचक निरीक्षक रॉबिन सिंह ने वाराणसी के कैंट थाना क्षेत्र से पीड़िता को बरामद किया।
* मोबाइल डेटा से खुलासा: पीड़िता के मोबाइल फोन और पूछताछ के दौरान ऐसे कई वीडियो व डिजिटल साक्ष्य मिले, जिनसे पता चला कि आरोपी अश्लील फिल्में बनाकर मोटी कमाई कर रहा था।

अदालत में पेश किए गए 11 महत्वपूर्ण गवाह

इस जटिल और तकनीकी अपराध को साबित करने के लिए सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक दीप नारायण और विशेष अभियोजक अधिकारी संतोष सिंह ने प्रभावी पैरवी की। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 11 महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही कराई गई, जिनमें:

1. पीड़ित मासूम बच्ची
2. पीड़िता की मां
3. बाल कल्याण समिति (CWC) की अध्यक्ष
4. बैंक अधिकारी
5. सीबीआई के विवेचक निरीक्षक रॉबिन सिंह
6. रिलायंस जियो के नोडल अधिकारी
7. फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (गांधीनगर) के विशेषज्ञ शामिल रहे।

 "चाइल्ड पोर्नोग्राफी में लिप्त व्यक्ति समाज के लिए खतरा": पॉक्सो कोर्ट

मामले पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश नितिन पाण्डेय की अदालत ने तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा:

 "दोषी ने पहले मासूम बालिका को गंदे वीडियो दिखाए, फिर उसके अश्लील फोटो व वीडियो बनाए। इसके बाद उसे डरा-धमकाकर बार-बार उसका शारीरिक शोषण किया। भारत ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी एक गंभीर अपराध है। ऐसे कृत्य में लिप्त व्यक्ति न केवल मानसिक रोगी है, बल्कि वह संपूर्ण समाज के लिए सीधा खतरा है। इससे बच्चों का मानसिक विकास अवरुद्ध होता है और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा नष्ट होती है।"